उन्नाव। अगर उल्लंघन के लिए रेखाएं नहीं होती, जीतने के लिए बाधाएं नहीं होती, पार करने के लिए सीमाएं नहीं होती तो मानव जीवन में पुरस्कार की तरह आने वाले आनंद के अनुभवों में कमी अवश्य आ जाती है। संसार में जितने भी महापुरुष हुए हैं उन्होंने स्वयं के बल पर ही प्रगति की है। आत्मबल एवं आत्म विश्वास के सहारे ही उन्होंने कीर्तिमान रचे।
मंजिल स्वयं के कदमों से चलकर ही प्राप्त की जा सकती है। कोई दूसरा व्यक्ति आपकी यात्रा पूरी नहीं करेगा। इसलिए गीता में आह्वान किया गया है कि हे मनुष्य अपना उत्थान आप करो। मानव जीवन के लिए यह एक दिव्य मंत्र है। यह बातें ईश्वरीय विश्वविद्यालय की बहन बीके पूनम ने पुराना नार्मल स्कूल में चल रहे अलविदा तनाव शिविर में बताईं।
उन्होंने कहा कि दृढ़ता ही सफलता की चाबी है। दृढ़ संकल्प की शक्ति के आगे जीवन के सारे विघभन धराशायी हो जाते हैं। मनुष्य के भीतर ही उसका भाग्य छिपा होता है। जीत के लिए जोखिम उठाना पड़ता है। अब्राहम लिंकन ने हमेशा असफलताओं का सामना किया और अंत में वे अमेरिका के राष्ट्रपति चुने गए।
प्रसिद्ध दार्शनिक सुकरात का जीवन भी पारिवारिक तकलीफों में बीता लेकिन जीवन में उन्होंने कभी हार नहीं मानी। महात्मा गांधी दक्षिण अफ्रीका में रहकर अनेेक विपत्तियों का सामना किया और विपत्तियां आगे जाकर उनकी ताकत बन गईं। हम सबके प्रति शुभ भावना रखें, प्रतिकूलता में भी अनुकूलता देखें, दुख में भी सुख खोजें, जीवन के भरे हिस्से को देखें एवं सबका कल्याण हो यह भावना अपने अंदर जाग्रत करें।