लाख चेताने के बाद भी सरकारी अस्पतालों में इलाज के साथ साफ-सफाई व्यवस्था ध्वस्त है। सीएचसी, पीएचसी की बात कौन करे जब जिला महिला अस्पताल परिसर में ही गंदगी के ढेर लगा है। अस्पताल से निकलने वाला मेडिकल वेस्ट अस्पताल परिसर में फेंका जा रहा है। बायो मेडिकल वेस्ट के निस्तारण की समुचित व्यवस्था होने के बाद भी लापरवाही बरती जा रही है। उधर, जिम्मेदारों का हाल यह है कि सीएमओ यह कह कर पल्ला झाड़ रहे हैं कि कूड़ा बायोमेडिकल वेस्ट नहीं है। इसे नगर पालिका को उठाना है।
जिला महिला अस्पताल में साफ-सफाई के दौरान निकलने वाले कूड़े को सफाई कर्मचारी अस्पताल परिसर में ही बने फेंक रहे हैं। रोजाना कचरा फेंकने से परिसर में ढेर लग गया है। मेडिकल वेस्ट के निस्तारण की जिम्मेदारी एक निजी कंपनी के जिम्मे है। इसके एवज में कंपनी को हर माह स्वास्थ्य विभाग महिला अस्पताल से निकलने वाले कचरे के निस्तारण के लिए कानपुर की एक संस्था को जिम्मा सौंपा गया है। नियमानुसार संस्था को चौबीस घंटे में मेडिकल वेस्ट को उठाना होता है, लेकिन ऐसा नहीं हो रहा है। मिलीभगत के कारण हफ्ते में तीन दिन ही कूड़ा उठवाया जा रहा है। अस्पताल से निकलने वाले बायो मेडिकल वेस्ट के लिए बनाए गए नियमों का पालन होता नहीं दिखता। बायो मेडिकल वेस्ट उठाने वाली कंपनी की ओर से अस्पताल में लाल, पीला, नीला और काले रंग के चार बैग उपलब्ध कराए जाते हैं। इन बैग में अलग अलग तरह के कचरे को एकत्रित किया जाता है और बाद में उसका निस्तारण किया जाता है। लेकिन अस्पताल में कचरे को बैग में न रख उसे खुले में फेंक दिया जाता है।
मुसीबत बन सकती है लापरवाही
मौसम बदलने के साथ खसरा व अन्य वेक्टर जनित रोगों का हमला भी तेज हो जाता है। बायो मेडिकल वेस्ट को लेकर स्वास्थ्य विभाग की ओर से बरती जा रही लापरवाही बड़ी मुसीबत पैदा कर सकती है। अस्पताल से निकलने वाले वेस्ट में इस्तेमाल हो चुकी सिरिंज से लेकर कई तरह की दवाएं व हानिकारक चीजें शामिल रहती हैं। प्रयोग के बाद खुले में फेंक दी जाने वाली सिरिंज किसी के लिए भी बड़ा खतरा पैदा कर सकती है।
क्या कहते हैं प्रभारी सीएमओ
अस्पताल परिसर में जो कूड़ा पड़ा हुआ है वह बायोमेडिकल वेस्ट नहीं है। इस कूड़े को नगर पालिका को उठवाना है। कूड़ा उठवाने के लिए ईओ को पत्र लिखा जाएगा। मंत्री जी ने नवाबगंज में निरीक्षण के दौरान गंदगी पाए जाने पर जिस जिस मां गायत्री कंप्यूटर सफाई व्यवस्था का टेंडर निरस्त करने की बात कही थी उसका कागज अभी तक मेरे पास नहीं आया है।- डॉ. एसपी चौधरी, प्रभारी सीएमओ।