पुलिस विभाग में लापरवाही का अजीबोगरीब मामला सामने आया है। जीआरपी में तैनात एक दरोगा को विभाग सेवानिवृत्त करना ही भूल गया। सेवानिवृत्त की तारीख बीतने के तीन महीने बाद तक वह नौकरी करता रहा।
जब निरीक्षण के दौरान एसपी जीआरपी ने रजिस्टर देखा, तब मामला पकड़ में आया। आननफानन दरोगा को बुलाया गया और सेवानिवृत्ति दे दी गई। दरोगा का कहना है कई बार मुख्यालय में जानकारी की तो बताया गया सेवानिवृत्त 2018 में होगा। एसपी ने जांच और दोषियों पर कार्रवाई के साथ ही भुगतान किए गए वेतन की रिकवरी कराने की बात कही है।
उन्नाव जीआरपी थाने में पन्नालाल एसआई के पद पर तैनात थे। उनके सेवानिवृत्त की तिथि 10 फरवरी 2017 थी, लेकिन लखनऊ स्थित जीआरपी कार्यालय में तैनात बाबू ने उन्हें ना तो इसकी कोई सूचना दी और ना ही इसके तहत कोई कार्रवाई शुरू की। इस पर एसआई पन्नालाल बाकायदा ड्यूटी करते रहे और सेवानिवृत्त को करीब तीन महीने बीत गए। इस दौरान उन्हें दो महीने का वेतन भी मिला।
आठ मई को एसपी जीआरपी विनय कुमार ने जीआरपी ऑफिस लखनऊ का निरीक्षण किया तब उन्हें इसकी जानकारी हुई। एसपी ने एसओ जीआरपी उन्नाव सीपी सिंह को एसआई पन्नालाल को लखनऊ कार्यालय लेकर आने को कहा। एसओ दारोगा को लेकर कार्यालय पहुंचे, जहां एसपी ने उन्हें तत्काल सेवानिवृत्त कर दिया। एसपी ने मामले की जांच के निर्देश दिए हैं।
बाबू पर गिर सकती है गाज
उन्नाव। दारोगा के सेवानिवृत्त होने के बाद भी इसकी जानकारी न देने और उसका वेतन जारी करने पर लखनऊ जीआरपी ऑफिस में तैनात बाबू पर गाज गिर सकती है। विभागीय अफसरों के अनुसार किसी पुलिस कर्मी की सेवानिवृत्त नजदीक होने पर संबंधित कर्मचारी को इसकी नोटिस जारी करने व सेवानिवृत्त के बाद वेतन रोकने और पेंशन जारी करने की प्रक्रिया पूरी करने की जिम्मेदारी बाबू की होती है।
यह है मामला
एसओ जीआरपी उन्नाव सीपी सिंह ने बताया एसआई पन्नालाल को 10 फरवरी 2017 को सेवानिवृत्त होना था, लेकिन इसकी सूचना न होने पर वह ड्यूटी करते रहे। 8 मई को जीआरपी कप्तान के निरीक्षण में जब यह मामला सामने आया तो एसआई को तत्काल सेवानिवृत्त कर दिया गया।