उन्नाव। दही चौकी साइट-एक में पहला बायोडीजल प्लांट बनकर तैयार हो गया है। इसे जल्द से जल्द शुरू करने की कवायद की जा रही है। 20 करोड़ की लागत से तैयार हुए इस प्लांट से करीब पांच हजार लोगों को रोजगार मिलने की उम्मीद है। इतना ही नहीं इंडियन ऑयल ने प्लांट से बायोडीजल खरीदने की मंजूरी भी दे दी है।
केंद्र व प्रदेश सरकार इस समय कच्चे तेल पर निर्भरता कम करने की तैयारी कर रही है। इसके लिए बायोडीजल उत्पादन को बढ़ावा देने का काम किया जा रहा है। इसी कड़ी में तेजी से बायोडीजल प्लांट स्थापित किए जा रहे हैं। उन्नाव में दही चौकी औद्योगिक क्षेत्र साइट-एक, चांदपुर के पास 20 करोड़ की लागत से एक प्लांट स्थापित करने का काम दो साल पहले शुरू हुआ था। अब यह प्लांट बनकर तैयार हो गया है। अब प्लांट का संचालन करने की कवायद तेज कर दी गई है।
-
बीघापुर में व सफीपुर में भी निर्माणाधीन हैं प्लांट
उन्नाव औद्योगिक उद्यमों का हब बनता जा रहा है। इसी में बायोडीजल प्लांट भी तेजी से बन रहे हैं। दही चौकी में जहां प्लांट तैयार हो चुका है, वहीं बीघापुर व सफीपुर में निर्माणाधीन है। छह माह में इन दोनों का भी संचालन शुरू हो सकता है। उद्योग विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, बायोडीजल निर्माण में जो कच्चा माल लगता है, उसमें पशु वसा भी शामिल है। जो यहां आसानी से मिल जाएगा। यहां छह स्लाटर हाउस संचालित हैं। इन स्लाटर हाउस से पशु वसा आसानी से उपलब्ध हो जाएगा। इसी कारण यहां पर प्लांट लगाने के लिए काफी उद्यमी आगे आ रहे हैं।
ऐसे बनेगा बायोडीजल
बायोडीजल प्लांट में कच्चे माल को विभिन्न मशीनों के माध्यम से मिश्रित किया जाएगा। इसमें वसा, वनस्पित तेल सहित अन्य पदार्थों को अल्कोहल के साथ मिलाया जाएगा। इससे बायोडीजल बनेगा। क्षेत्रीय प्रदूषण अधिकारी डॉ. शशिबिंद के मुताबिक, बायोडीजल एक नवीकरणीय ईंधन है और पारंपरिक डीजल की तुलना में कम हानिकारक गैसों का उत्सर्जन करता है। इसलिए यह पर्यावरण के लिए भी अनुकूल है।
बायो डीजल उत्पादन प्लांट से करीब पांच हजार लोगों को प्रत्यक्ष रूप से रोजगार देने में सहायक सिद्ध होगा। इसके अलावा किसानों और व्यवसायों के लिए अवसर पैदा करेगा। बायोडीजल में पशु वसा का प्रयोग होता है। यहां पर स्लाटर हाउसों की संख्या अधिक होने से प्लांट संचालन के लिए कच्चा माल मिलने में परेशानी नहीं आएगी।
रवि कुमार, निवेश मित्र उद्योग विभाग