बेहतर बारिश की उम्मीद में सिंघाड़ा की फ सल तैयार करने वाले किसानों में खुशी की लहर है। किसानों ने आसपास के तालाबों व झीलों में सिंघाडे़ की बेल डालना भी शुरू कर दिया है। क्षेत्र के एक सैकड़ा से अधिक गांवों के लोग फसल तैयार करने में तेजी से जुट गए हैं।
बताते चलें कि सदर तहसील के गंगा कटरी क्षेत्र के लगभग एक सैकड़ा गांवों के लोग सिंघाडे़ की फ सल तैयार करते आ रहे हैं। पिछले दो-तीन वर्षों से पर्याप्त बारिश न होने से किसानों को फसल में पंपिंग सेट से पानी भरना पड़ता था, लिहाजा लागत भी बढ़ जाती थी। इस वर्ष समय पर बारिश होने से इन किसानों ने परियर से 12 किलोमीटर दूर चकलवंशी तक फैली झील में व आसपास के तालाबों में सिंघाड़ा की बेल डालकर फ सल तैयार करना शुरू कर दिया है। मालूम हो कि सिंघाड़ा की फसल तैयार कर रहे ज्यादातर लोग भूमिहीन हैं। यह लोग इसी फसल के जरिए परिवार का भरण-पोषण करते हैं। सिंघाड़े की अच्छी पैदावार होने से इन लोगों का साल भर इसी से खर्चा चलता है।
सितंबर तक तैयार हो जाएगी फसल
फसल सितंबर माह तक तैयार हो जाती है। बाजारों में भी जमकर बिक्री होती है। यह शरीर को कई प्रकार से फायदा पहुंचाता है। सिंघाड़ा को किसान सूखाकर अच्छे दामों में बेचते हैं। इसका आटा बनाकर लोग व्रत में उपयोग करते हैं। इसके खरीदने व बेचने की बड़ी मंडी कानपुर है। क्षेत्र के पूरन कश्यप, राजेश, अनिल, मुकेश कश्यप, गौरीशंकर, महेश, गरीबे कश्यप सहित अन्य लोगों ने इस बार सिंघाडे़ की अच्छी पैदावार होने की उम्मीद जताई है।