सब जगह से मायूस होकर क्रोनिक रोगों के इलाज के लिए लोग होम्योपैथिक का सहारा लेते हैं, लेकिन यहां भी मरीजों की जिंदगी के साथ किस खिलवाड़ हो जाता है। शहर के छोटा चौराहा पर किराए के भवन में चल रहे होम्योपैथिक अस्पताल में नशीली दवाएं मिलने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। एसीएमओ की छापेमारी में इसका खुलासा हुआ। अस्पताल का पंजीकरण है ना इलाज कर रहा डाक्टर अपनी डिग्री दिखा पाया। यहां कई प्रतिबंधित व नशीली दवाएं भी मिलीं। नोडल अफसर ने अस्पताल संचालन न करने का आदेश जारी करते हुए संचालक पर कार्रवाई के लिए डीएम के पास फाइल भेजी है।
सीएमओ कार्यालय से मात्र एक किलोमीटर दूर छोटा चौराहा पर डा. आरके ठकुराल के नाम से होम्योपैथिक क्लीनिक लगभग दस सालों से संचालित है। सीएमओ की नाक के नीचे चल रहे अस्पताल पर किसी भी अधिकारी की नजर नहीं पड़ी। अस्पताल में दवा लेने गए एक मरीज को शक होने पर उसने इसकी शिकायत सीएमओ कार्यालय में की। गुरुवार को नर्सिंगहोम के नोडल अफसर डा. पीके श्रीवास्तव व नीरज निगम अस्पताल पहुंचे। जांच के दौरान अस्पताल का पंजीकरण नहीं मिला। मौजूद डा. विनय से उनकी डिग्री मांगी तो वह नहीं दिखा सके। इसके अलावा अस्पताल में कंसल्टेंट क्लीनिकल स्वाती श्रीवास्तव व दवा स्टोर संचालक मिला। जांच की गई तो ज्यादातर प्रतिबंधित व नशीली दवाएं मिली । एसीएमओ के मुताबिक नशीली दवाएं बेचना जघन्य अपराध है। अस्पताल में मरीजों की जिंदगी के साथ खुलेआम खिलवाड़ करना पाया गया।
नोडल प्रभारी डा. पीके श्रीवास्तव ने डा. विनय से डाक्टर आरके ठकुराल की जानकारी की तो पता चला कि वह आनलाइन मरीजों को देखते हैं। तीन महीने में एक बार ही अस्पताल आते हैं। अस्पताल प्रत्येक गुरुवार को खुलता है। नोडल अफसर कुछ दवाओं व अस्पताल से संबंधित दस्ताबेज लेकर अपने साथ चले गए।
क्या बोले सीएमओ
नोडल अफसर को जांच के लिए भेजा गया था। होम्योपैथिक अस्पताल में नार्कोटिक दवाएं मिली हैं। अस्पताल का पंजीकरण नहीं पाया गया है। डॉक्टर के पास डिग्री भी नहीं थी। कमियों को देखते हुए अस्पताल संचालक पर कार्रवाई के लिए डीएम के पास फाइल भेजी गई है। डा. भूपेंद्रनाथ श्रीवास्तव, सीएमओ