अजगैन (उन्नाव)। पत्नी की गैर इरादतन हत्या के आरोप में सजा काट रहे अधेड़ की चार साल पहले इलाज के दौरान हुई मौत की घटना में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने कारागार विभाग को मृतक के परिवार को एक लाख रुपये मुआवजा देने के निर्देश दिए हैं।
यह जानकारी मिलने पर मृतक की मां और बच्चों की खुशी का ठिकाना नहीं है। मां को इस बात की तसल्ली है कि बेटे के मुआवजे की रकम से वह कर्ज चुका देगी और बेटा मजदूरी छोड़कर अपना छोटा-मोटा व्यवसाय शरू करने की सोच रहा है। जेल अधीक्षक ने बताया कि मुआवजे की धनराशि मुख्यालय से मिलते ही परिवार को दे दी जाएगी।
अजगैन थानाक्षेत्र के पांडेय खेड़ा लालपुर गांव निवासी हरिशंकर ने फरवरी 2012 को विवाद के दौरान पत्नी कल्लो को कुल्हाड़ी मारकर घायल कर दिया था। पत्नी को घायल करने के बाद वह भाग निकला था और दूसरी तरफ पत्नी की इलाज के दौरान मौत हो गई थी।
तत्कालीन अजगैन थानाध्यक्ष घनश्याम तिवारी ने घटना के दूसरे दिन हरिशंकर को गिरफ्तार कर जेल भेजा था। पत्नी की गैर इरादतन हत्या का दोष सिद्ध होने पर फरवरी 2012 को न्यायालय ने हरिशंकर को दस साल कारावास की सजा सुनाई थी। जेल में हरिशंकर मानसिक रूप से बीमार हो गया। हालत गंभीर देख जेल अधिकारियों ने उसे बनारस मेंटल हॉस्पिटल में भर्ती कराया था जहां 19 अगस्त 2012 को उसकी मौत हो गई थी।
इलाज में लापरवाही सामने आने पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने कारागार सुधार एवं प्रशासन विभाग को मृतक के आश्रितों को एक लाख रुपये मुआवजा देने का निर्देश दिया है। जेल अधीक्षक आरएन पांडेय ने बताया कि मुख्यालय से जल्द ही धनराशि मिल जाएगी। पैसा मिलते ही आश्रित परिवार को उपलब्ध कराया जाएगा।