बांगरमऊ (उन्नाव)। सीएम के ड्रीम प्रोजेक्ट लखनऊ-आगरा एक्सप्रेस-वे में अधिग्रहीत की गई भूमि से अधिक पर खनन करने का आरोप लगाकर ग्रामीणों ने शनिवार को निर्माण कार्य में लगे कंपनी के सेफ्टी मैनेजर को बंधक बनाकर पीटा।
गुस्साए ग्रामीणों ने सेफ्टी मैनेजर को बचाने आए जेई, सुपरवाइजर और मशीन चालक की भी पिटाई कर दी। घटना की सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची तो हमलावर भाग निकले। रेंज मैनेजर की तहरीर पर पुलिस ने तीन ज्ञात और 20 अज्ञात लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की है। पुलिस आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए देर शाम तक छापेमारी करने का दावा करती रही।
बांगरमऊ तहसील क्षेत्र के रसूलपुर मझिगवां गांव के लोग अधिग्रहित की गई जमीन से अधिक जमीन पर कब्जा और मानक से ज्यादा मिट्टी खनन का आरोप लगा रहे है। वे इस आरोप को लेकर कई दिनों से विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। शनिवार दोपहर लखनऊ-आगरा एक्सप्रेस वे के निर्माण का काम करा रही अपकान इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी के सेफ्टी मैनेजर किशोर चंद्र जैना मझिगवां गांव के पास जमीन की पैमाइश कराने पहुंचे।
इसी दौरान ग्रामीण हमलावर हो गए। उन्होंने सेफ्टी मैनेजर को घेर लिया और मारपीट करते हुए गांव के पास एक बाग में ले गए। वहां ग्रामीणों ने जमकर पिटाई की। जानकारी होने पर सुपरवाइजर शुभ्रांत नलिन, जेई सचिन तिवारी और ग्रेंडर मशीन चालक अनिल दुबे सेफ्टी मैनेजर को बचाने पहुंच गए। इसपर ग्रामीणों ने उनके साथ भी मारपीट की।
सूचना पर बांगरमऊ कोतवाली प्रभारी रंजीत सिंह फोर्स के साथ मौके पहुंचे मगर तबतक हमलावर भाग चुके थे। पुलिस ने घायल कर्मचारियों को बांगरमऊ स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया। अन्य कर्मचारियों की मरहम पट्टी कराई गई जबकि सेफ्टी मैनेजर को इलाज के बाद लखनऊ रेफर कर दिया गया।
क्षेत्रीय प्रबंधक प्रमोद कुमार की तहरीर पर पुलिस ने रसूलपुर गांव निवासी अमर सिंह, जयपाल, मान सिंह, कल्लू समेत बीस लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की है। कोतवाली प्रभारी ने बताया कि आरोपियों की गिरफ्तारी के प्रयास किए जा रहे हैं।
सहमे कर्मचारियों ने काम करने से किया इनकार -रेंज मैनेजर
उन्नाव। प्रोजेक्ट के रेंज मैनेजर प्रमोद कुमार ने बताया कि काफी दिनों से कुछ ग्रामीण निर्माण का विरोध कर रहे हैं। इस संबंध में क्षेत्रीय लेखपाल, कानूनगो से पैमाइश की बात कही गई तो वह भी वहां जाने से डरते हैं। वह पुलिस बल के बिना मौके पर जाने से मना कर रहे हैं। निर्माण में तेजी लाने का इतना दबाव है कि कंपनी के कर्मचारियों को जान जोखिम में डालकर जाना ही पड़ता है। उन्होंने बताया कि इस घटना के बाद कोई भी कंपनी का कर्मचारी काम करने को तैयार नहीं है।