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मेडिकल छात्रों का हंगामा, जाम लगाया

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हाइवे पर बैठकर धरना प्रदर्शन करते कर रहे छात्रों को उठाते सीओ। संवाद - फोटो : UNNAO
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नवाबगंज। सरस्वती मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहे प्रथम वर्ष के छात्रों ने कॉलेज प्रबंधन पर दो बार से लगातार फे ल कराने का आरोप लगा हंगामा किया। लखनऊ-कानपुर हाईवे पर दो घंटे जमा लगाकर प्रदर्शन किया। लखनऊ से कानपुर जाने वाली लेन पर कई किमी लंबी वाहनों की कतार लग गई। हसनगंज सीओ ने छात्रों की कॉलेज निदेशक से बात कराई। परीक्षा परिणाम सही कराने के लिखित आश्वासन पर छात्र शांत हुए।
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सरस्वती मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस 2019 प्रथम बैच के 150 छात्रों ने 28 जनवरी 2020 को कानपुर के छत्रपति साहू जी महाराज विश्वविद्यालय में फिजियोलॉजी, बायोकेमेस्ट्री और एनाटमी विषय की परीक्षा दी थी। छात्रों के मुताबिक 5 जून को उनका रिजल्ट आया। परीक्षा परिणाम में सिर्फ 20 छात्र सफल हुए। फेल हुए 130 छात्रों की 27 सितंबर को पूरक परीक्षा हुई। इसमें भी केवल 25 छात्र सफल हुए और 105 छात्र फिर फेल हुए। इससे नाराज छात्र बुधवार सुबह 11:55 बजे सड़क पर उतरे और लखनऊ-कानपुर हाईवे पर बैठ गए। छात्रों ने मेडिकल कॉलेज प्रबंधन पर आरोप लगाया कि प्रबंधन की वजह से फेल हो रहे हैं।
आरोप लगाया कि साल 2019-20 में दाखिला लेते समय प्रथम वर्ष की 15 लाख फीस के साथ तीन लाख रुपये सिक्योरिटी जमा कराई गई थी। फेल किए जाने से तीन साल में 54 लाख रुपये प्रति छात्र जमा किया गया है। अब आर्थिक स्थिति ठीक न होेने से डॉक्टर बनने का सपना टूट रहा है। छात्रों का कहना था कि कालेज प्रबंधन व विश्वविद्यालय की आपसी तकरार, रिजल्ट खराब होने की वजह है। हम सभी छात्रों ने नीट की परीक्षा पास की है। ऐेसे में लगातार फेल होना संदेह पैदा कर रहा है। छात्रों के मुताबिक फिजियोलॉजी विषय में 98, बायोकेमेस्ट्री में 50 और एनाटमी में 13 छात्र फेल हुए है। अब परीक्षा में जो भी खर्च आएगा विद्यालय प्रबंधन वहन करे। छात्रों की बात सुनने के बाद सीओ हसनगंज आरके शुक्ला ने कॉलेज निदेशक सौरभ कंवर को धरना स्थल पर बुलाया और छात्रों से वार्ता कराई। उन्होंने छात्रों को लिखित आश्वासन दिया कि कॉलेज का पांच सदस्यीय पैनल विश्वविद्यालय जाकर बात करेगा और समस्याओं को निस्तारण कराएगा। इसके बाद हंगामा शांत हुआ। इस दौरान हाईवे का यातायात सामान्य होने में दो घंटे का वक्त लगा।
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एमबीबीएस कर रहे बिहार प्रांत निवासी सुबोधराज ने बताया कि पिता वीरेंद्र किसानी करते हैं। उनका सपना था बेटा डॉक्टर बने। इसके लिए पिता जीवन की गाढ़ी कमाई मेरी पढ़ाई पर खर्च कर रहे हैं। ऐसे में रिजल्ट को देखकर परिवार में तनाव है। तमिलनाडु के जयप्रकाश ने बताया कि उनके पिता कलैया रसन प्राइवेटकर्मी है। उन्होंने डाक्टर बनाने के लिए बैंक से लोन लिया था। लगातार दो बार से ऐसे खराब रिजल्ट से परिवार आर्थिक रुप से टूट चुका है। घरवालों ने आगे से फीस जमा करने से भी मना कर दिया है।
एमबीबीएस के छात्र सौरभ प्रकाश व बिकी झा का अपने साथी उत्तर अदक से आपसी विवाद हुआ था। कॉलेज प्रबंधन ने एंटी रैगिंग एक्ट के तहत सौरभ प्रकाश व बिकी को निलंबित किया था। सीओ के हस्तक्षेप के बाद दोनों का निलंबन बहाल हुआ।
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