नगर पालिका व पंचायतों में संविदा पर सफाईकर्मियों की भर्तियां होेनी है। इसके लिए जिले भर से आवेदन मांगे गए हैं। वैसे तो इसमें शैक्षिक योग्यता की कोई पाबंदी नहीं है, लेकिन बेरोजगारी का ही नतीजा है कि डाकघरों में आवेदन करने आने वालों में उच्च शिक्षित बेरोजगारों की भीड़ उमड़ रही है। हताश युवक अपनी शैक्षिक योग्यता को किनारे कर झाड़ू उठाने को भी तैयार हैं। डाकघर में रोजाना हजारों की संख्या में अभ्यर्थी आवेदन फार्म की रजिस्ट्री कराने पहुंचे रहे हैं।
ग्रेजुएट व पोस्ट ग्रेजुएट डिग्रीधारकों की भीड़
इनमें साक्षरों से अधिक इंटरमीडिएट, ग्रेजुएट व पोस्ट ग्रेजुएट डिग्रीधारकों की भीड़ सफाई कर्मी बनने के लिए कतार में हैं। अजगैन निवासी कृष्ण कुमार सोनी ने कहा कि वह पढ़ाई करना चाहता था, लेकिन पिता की मौत होने से इंटर तक ही पढ़ सका और अब उसने परिवार चलाने को सफाई कर्मी की नौकरी करने का निर्णय लिया है। इसके अलावा सोहरामऊ के सुरेश पांडेय, सफीपुर के रवि सिंह, शेखपुर के रजनीकांत सहित दर्जनों ऐसे अभ्यर्थी फार्म भरने पहुंचे जो किसी न किसी मजबूरी के चलते व अच्छी नौकरी न मिलने से सफाई कर्मी बनने को भी कमर कस चुके हैं।
डिग्री तो है लेकिन एक अदद नौकरी नहीं
इन बेरोजगारों के पास डिग्री तो है लेकिन स्थायी नौकरी नहीं है। ऐसे में इनमें से कई फैक्ट्रियों में काम कर रहे हैं तो कुछ दुकान आदि के सहारे अपना जीवनयापन करने को मजबूर हैं।
तो भविष्य में नौकरी हो जाएगी परमानेंट
इन आवेदनकर्ताओं का कहना है कि भविष्य में सफाईकर्मियों के स्थायी होने की भी उम्मीद है। इसी कारण वह लोग इसी आशा से अभी फार्म डाल रहे हैं कि किसी तरह से नौकरी मिल जाए। कम से कम सफाई कर्मी की नौकरी मिलने के बाद 14-15000 रुपये तो माहवार मिलने लगेंगे। इससे परिवार का भरणपोषण करना कुछ आसान हो जाएगा।
प्रकाश तिवारी
केस-1
नाम-दिवाकर सविता
निवासी-फतेहपुर चौरासी
डिग्री-परास्नातक
केस-2
नाम-सुधीर कुमार गौतम
निवासी-बिछिया
डिग्री-ग्रेजुएशन के साथ कंप्यूटर कोर्स
केस-3
नाम-सत्येंद्र पाल
निवासी-शिवनगर
डिग्री-स्नातक