उन्नाव। हत्या के मामले में जेल में बंद सजायाफ्ता कैदी ने परिजनों के सामने ही इलाज कराने की मांग को लेकर जिला अस्पताल में जमकर हंगामा काटा। इलाज करने आए डॉक्टर को हाथ तक नहीं लगाने दिया। बाद में साथ रहे सिपाहियों ने वार्ड नंबर एक में ले जाकर बेड नंबर पांच पर उसे जबरदस्ती लिटाया और भाग जाने के डर से पैर भी जंजीर से बांध दिए। तब कहीं जाकर वह शांत हुआ लेकिन परिजनों के आने तक उसने अपना इलाज नहीं कराया। इससे डॉक्टर व नर्स भी परेशान रहे।
बीघापुर थानाक्षेत्र के गांव घाटमपुर खुर्द में रहने वाला मुन्ना दीक्षित (65) आठ माह से एक हत्या के मामले में जेल में बंद है। रविवार को फाइलेरिया बीमारी के कारण उसे बुखार आने पर जिला जेल से जिला अस्पताल भेजा गया था। सिपाही अखिलेश व रामभरोसे उसे लेकर जिला अस्पताल आए थे। इमरजेंसी में मुन्ना का चेकअप होने के बाद फिजीशियन डॉ. शोभित अग्निहोत्री ने वार्ड नंबर एक बेड नंबर पांच में भर्ती कराया। यहां जब डॉक्टरों व नर्सों ने उनका इलाज करने का प्रयास किया तो उसने हंगामा काटना शुरू कर दिया। इस दौरान वहां भीड़ एकत्र हो गई और वार्ड नंबर दो पर मौजूद मरीज के परिजन भी अपना मरीज वहां से लेकर दूसरे बेड पर चले गए।
मुन्ना का कहना था कि अस्पताल में वह इलाज तब तक नहीं करा सकता जब तक उसके परिजन नहीं आ जाते। अस्पताल की दवाएं लेने से भी मना कर दिया। साथ ही डॉक्टर से मेडिकल स्टोर से दवा मंगाने की बात कही। लेकिन जब डॉ. शोभित ने अस्पताल में ही दवा होने की बात कही तो उसने इलाज कराने से मना कर दिया। हंगामा अधिक कटता देख डॉ. शोभित ने जेलर को फोन भी मिलाया लेकिन उनका फोन नहीं उठा। बाद में सिपाहियों ने भागने के डर से मुन्ना का पैर जंजीर से बेड में बांध दिया। बाद में जब कैदी कुछ शांत हुआ तो पैर खोल दिया गया। बुखार होने के कारण सीएमएस ने बंदी रक्षकों से उसकी देखरेख करने की बात कही बाद में काफी समझाने के बाद उसको दवा दी जा सकी।
वर्जन
जेल से जो पर्चा आया था उसमें फुल ट्रीटमेंट लिखा हुआ था। रविवार का दिन होने के कारण उसकी जांच नहीं हो पाई है। दवा दी जा रही है। सोमवार को उसकी जांचे कराई जाएंगी। रिपोर्ट आने के बाद ही उसको अस्पताल से भेजा जाएगा। फिलहाल बंदी रक्षक उसकी निगरानी कर रहे हैं। - डॉ. एसपी चौधरी, सीएमएसए