मंगगतखेड़ा गांव में पंप सेट से धान की सिचाई करता किसान रामपाल यादव।
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उन्नाव। डीजल के बढ़े रेट से खेत की जुताई और पंपसेट से सिंचाई महंगी हो गई है। जिससे अन्नदाता की मुश्किलें बढ़ गई हैं। खरीफ सीजन की शुरुआत हो चुकी है ऐसे में धान समेत अन्य फसलों की जुताई शुरू हो चुकी है। बुवाई के लिए सिंचाई की जरूरत पड़ रही है। वर्तमान समय में डीजल 72.30 प्रति लीटर बिक रहा है। कुछ दिन पहले ही डीजल के दामों में बढ़ोतरी से ट्रैक्टर से जुताई और निजी ट्यूबवेल से सिंचाई भी महंगी हो गई है। ऐसे में किसानों के सामने मुश्किल खड़ी हो गई है।
मियागंज के जुनेदपुर निवासी किसान रामस्वरूप ने बताया कि डीजल महंगा होने से निजी ट्यूबवेल संचालकों ने सिंचाई महंगी कर दी है। पहले 100 रुपये प्रति घंटा लेते थे अब 150 रुपये ले रहे हैं। धान की फसल में कई बार सिंचाई करनी पड़ती है। जिससे भविष्य में काफी मुश्किलें आ सकती हैं। 20 बीघा के काश्तकार बीघापुर के रामनेर निवासी पप्पू सिंह ने कहा कि डीजल की कीमत बढ़ने से सिंचाई महंगी हो गई है। इससे खेती की लागत भी बढ़ रही है। अच्छी कीमत नहीं मिली तो मुश्किलें आएंगी। कोरोना में राहत के बजाए डीजल की कीमत बढ़ने से किसान परेशान हैं।
बक्सर निवासी किसान सतीश वर्मा के मुताबिक, सुमेरपुर लोकसभा चुनाव के समय ऐसा लग रहा था कि भाजपा से ज्यादा मददगार और कोई नहीं हो सकती। किसान सम्मान निधि ने हमारे इस भरोसे को मजबूत किया था लेकिन अब धान की रोपाई के समय डीजल की कीमतें आसमान पर। हिलौली के मजरे झुलऊ निवासी किसान अशोक कुमार मिश्रा ने लघु एवं सीमांत कृषक किराए पर जुताई से लेकर सिंचाई और मड़ाई का कार्य करते हैं। जुताई से लेकर सिंचाई तक में बढ़ोत्तरी कर दी गई है। इससे किसानों की मुश्किलें बढ़ गई हैं।