बांगरमऊ कोतवाली क्षेत्र के ग्राम अकबरापुर निवासी नरेंद्र कुमार (32) को तीन दिन पहले तेज बुखार आया था। लखनऊ के निजी अस्पताल में डेंगू की पुष्टि होने के बाद उसका इलाज शुरू हुआ। सोमवार सुबह इलाज के दौरान नरेंद्र की मौत हो गई। शाम को नानामऊ घाट पर उसका अंतिम संस्कार हो गया।
नरेंद्र की मौत से उसकी पत्नी प्रेमलता (30) को गहरा सदमा लगा। पति के गम में उसने आंसू बहाकर रात गुजारी। मंगलवार भोर पहर चार बजे करीब वह अपनी सास रूपरानी, ससुर रामपाल व देवर विराज को सोता देख अपनी डेढ़ वर्षीय बच्ची सांझ को चारपाई पर छोड़ घर के बाहर निकल गई।
कुछ देर बाद बच्ची के रोने की आवाज सुन सास रूपरानी उसे देखने पहुंची तो बहू प्रेमलता चारपाई से गायब मिली। प्रेमलता के लापता होने की सूचना पर मोहल्ले में हड़कंप मच गया। परिजनों के साथ मोहल्ले के लोग उसकी तलाश में लग गए। इसी बीच शौच को गए कुछ लोगों ने उसे गांव से निकली शारदा नहर पुल पर रोते देखा। जब तक गांव के लोग उसके पास पहुंचते प्रेमलता ने नहर में छलांग लगा दी।
नहर गहरी होने से कोई उसमे कूदने की हिम्मत नहीं जुटा सका। आनन-फानन में उन्होंने महिला के परिजनों को घटना की जानकारी दी। मौके पर पहुंचे परिवार के लोगों को नहर पुल पर महिला की चप्पल पड़ी मिली। ग्रामीणों ने नहर पुल से एक किमी. दूरी तक नहर का पानी रोक उसे तलाशने की कोशिश शुरू की। इसी बीच पुलिस भी सूचना पाकर मौके पर पहुंच गई।
देर शाम तक नहर में महिला को तलाशा गया पर उसका पता नहीं चल सका। एसओ प्रदीप यादव ने बताया कि पति की मौत के गम में महिला ने नहर में छलांग लगाई है। पानी का बहाव तेज होने से उसका पता नहीं चल पाया है। बुधवार को फिर से महिला की नहर में तलाश की जाएगी।
पिता के बाद मां के साए से दूर हुई दुधमुंही
पिता की मौत से बेखबर प्रेमलता की डेढ़ साल की बच्ची सांझ मां को अपने पास न देख रोए जा रही थी। उसकी तड़प देख परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल था। सास रूपरानी पर तो जैसे पहाड़ टूट पड़ा हो। बेटे की चिता अभी ठंडी भी पड़ी थी कि बहू के इस फैसले से वह पूरी तरह टूट गई। दुधमुंही को गोद में लिए सास रूपरानी आंसू बहाए जा रही थी।