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बारिश में दशकों पुरानी जर्जर इमारतों से खतरा

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शहर के मुख्य मार्ग पर बड़ा चौराहा पर हादसों को दावत दे रही जर्जर इमारत। - फोटो : UNNAO
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उन्नाव। शहर में दशकों पुरानी हो चुकी जर्जर इमारतें कभी भी हादसे की वजह बन सकती हैं। बारिश में सीलन बढ़ने से इमारतें और खतरनाक हो गई हैं। अक्सर दीवारों व छत के हिस्से टूटकर गिरते हैं। ऐसे में इनमें रहने वाले व आसपास के लोगों के लिए खतरा बढ़ गया है।
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शहर में बड़ी संख्या में ऐसे जर्जर भवन हैं जिन्हें बने सैकड़ों साल बीत चुके हैं। एक साल पहले नगर पालिका ने सर्वे में 18 जर्जर भवनों को चिह्नित किया था और नोटिस जारी की थी। इन पुरानी इमारतों की दीवारों में दरारें पड़ गई हैं। छज्जों व छत के हिस्से भी अक्सर टूटकर गिरते हैं। इनमें कई इमारतें तो शहर के मुख्य मार्ग पर ही स्थित हैं। इससे कभी भी आसपास के दुकानदार, ग्राहकों व मुख्य मार्ग पर आवागमन कर रहे लोगों-वाहनों के लिए खतरा बन सकती हैं। हालांकि चिह्नित करने के बाद पालिका ने आगे की कार्रवाई नहीं की। जर्जर इमारतों में लोग पहले की तरह रह रहे हैं। पिछले साल बारिश के दौरान सदर बाजार में मोहल्ला शाहगंज स्थित एक पुरानी इमारत का मलबा टूटकर गिरा था। नगर पालिका ने इमारत में रह रहे लोगों को खाली करने को कहा था लेकिन मामला न्यायालय में विचाराधीन होने से कार्रवाई नहीं हो सकी।
मुकदमों की वजह से नहीं हो पा रही कार्रवाई
सूत्रों के अनुसार नगर पालिका ने शहर में जिन भवनों को जर्जर घोषित कर रखा है उनमें अधिकांश पर किराएदारी या मालिकाना हक का मुकदमा न्यायालय में विचाराधीन है। यही वजह है कि नगर पालिका इन पर कार्रवाई नहीं कर पाया।
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जिम्मेदारी टाल रहे विभाग
नगर पालिका ईओ आरपी श्रीवास्तव ने बताया कि जर्जर इमारतों पर कार्रवाई की जिम्मेदारी यूएसडीए (उन्नाव शुक्लागंज विकास प्राधिकरण) की है। पिछले साल नोटिस दी गई थी लेकिन बाद में अधिकार क्षेत्र का मामला फंस गया था।
यूएसडीए के सचिव पीके सिंह ने बताया कि यह जिम्मेदारी नगर पालिका की है। वह अगर इमारत की स्थिति के बारे में जेई या एक्सईएन की तकनीकी रिपोर्ट चाहता है तो लिखित मांग पर कराई जा सकती है। लेकिन कार्रवाई की जिम्मेदारी नगर पालिका की है।
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