फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

पान की फसल को नुकसान, मांगा मुआवजा

विज्ञापन
पुरवा तहसील परिसर में धरना प्रदर्शन करते राष्ट्रीय पान किसान यूनियन के किसान। - फोटो : UNNAO
विज्ञापन
पुरवा(उन्नाव)। कोहरे, पाले व बारिश से पान की फसल को हुए तगड़े नुकसान से किसान भुखमरी की कगार पर पहुंच गए हैं। पान उत्पादक किसानों ने सोमवार को डाकघर के सामने स्थित मैदान में राष्ट्रीय पान किसान यूनियन के बैनर तले धरना दिया। इस दौरान पान की खराब फसल भी दिखाई। बाद में 8 सूत्री मांगों का मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन एसडीएम को सौंपा।
विज्ञापन

धरने में मौजूद यूनियन के राष्ट्रीय महाचिव छोटेलाल, प्रभात, किरन चौरसिया, एएन चौरसिया, बेचा लाल चौरसिया, मुन्नीलाल, प्रदीप कुमार, सियाराम, शिवकुमार, रामकिशोर, रामभजन, नीलम, सरोजनी, लज्जावती व मनोरमा ने बताया कि ज्यादातर पान किसानों के पास खुद की भूमि नहीं है। वह किराये पर भूमि को लेकर पान की खेती करते हैं। जबकि पान को कृषि का दर्जा नहीं दिया गया है। साथ ही पान की खेती के लिए कोई विशेष सहायता नहीं दी गई है। इस बार एक माह से अधिक समय तक भीषण ठंड रही। इस दौरान गिरे कोहरे व पाले ने पान की फसल को सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाया। जिससे किसानों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। पान उत्पादक किसानों का कहना है कि मध्य प्रदेश सरकार 40 हजार रुपये प्रति हेक्टेयर की दर से मुआवजा देती है। उसी आधार पर प्रदेश सरकार को भी पान किसानों को मुआवजा देना चाहिए।
पान अनुदान वर्ष 2011-12 में उद्यान विभाग द्वारा जो इकाई लागत निर्धारित की थी उसे संशोधित करके नई दर लागू की जाए। पान फ सल को भी बीमा से आच्छादित कराया जाए। इसे कृषि का दर्जा दिया जाए। वहीं, जिला बलरामपुर के गांव सोनौढी में वंदना चौरसिया के हत्या की जांच एसआईटी से कराने और पीड़ित परिवार को 10 लाख रुपये की आर्थिक सहायता, जम्मू-कश्मीर में शहीद जवान के परिवार को 50 लाख रुपये तथा परिवार के एक सदस्य को नौकरी देने की मांग की गई। चौरसिया, बरई तमोली जाति को अन्य जाति से हटाकर अति पिछड़ी जाति में शामिल करने की भी बात कही गई। इसके बाद सभी किसान धरनास्थल से पैदल नारेबाजी करते हुए तहसील मुख्यालय पर पहुंचे और एसडीएम राजेश चौरसिया को ज्ञापन सौंपा। एसडीएम राजेश चौरसिया ने बताया कि ज्ञापन मुख्यमंत्री को भेजा जा रहा है।
विज्ञापन

पुरवा तहसील क्षेत्र के 29 गांवों में पान की खेती होती है। इस बार पाला काफी समय तक गिरा। जिससे भीठों में लगे पान खराब हो गए। पान उत्पादकों में नीलम, सरोजनी व भिखारीलाल ने कहा कि पान की फ सल पूरी तरह से नष्ट हो गई है। इससे साल भर का खर्च चलता है। आय का कोई दूसरा साधन न होने से आर्थिक स्थिति खराब हो गई है।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें