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जिसके अपहरण-दुष्कर्म में जेल काटी, वह स्कूल में रही मौजूद

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अचलगंज (उन्नाव)। बदले की भावना से परिवार के लोगों ने नाबालिग किशोरी को ढाल बनाकर तीन सगे भाइयों पर अपहरण, सामूहिक दुष्कर्म व एससीएसटी एक्ट की रिपोर्ट दर्ज कराकर जेल भिजवा दिया। पुलिस ने भी किशोरी के कलमबंद बयान को आधार बनाकर न्यायालय में आरोपपत्र दाखिल कर दिया।
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साजिश का का पर्दाफाश तब हुआ, जब आरटीआई के जवाब में डीआईओएस की ओर से अगवा कर दुष्कर्म किए जाने की अवधि में किशोरी के दो दिन स्कूल में मौजूद रहने की बात कही गई। इसी प्रमाण के आधार पर उच्च न्यायालय लखनऊ ने आरोपियों को जमानत दे दी। यह मामला अचलगंज थाना क्षेत्र के एक गांव का है।
गांव निवासी 16 वर्षीय दसवीं कक्षा की अनुसूचित जाति की छात्रा के पिता ने 12 दिसंबर 2019 को थाने में बेटी की गुमशुदगी दर्ज कराई थी। तहरीर में कहा था कि 11 दिसंबर को उसकी बेटी स्कूल जाने के लिए निकली थी। इसके बाद से उसका पता नहीं चला। पुलिस किशोरी की तलाश कर रही थी। तभी 17 दिन बाद 29 दिसंबर को छात्रा के पिता ने बेटी के कानपुर स्टेशन पर मिल जाने की पुलिस को जानकारी दी।
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अगले दिन 30 दिसंबर को पुलिस ने नाबालिग छात्रा के कलमबंद बयान कराए। बयान में छात्रा ने बताया था कि 11 दिसंबर को स्कूल से घर लौटते समय अचलगंज क्षेत्र के रताखेड़ा गांव निवासी धर्मेंद्र यादव, नितिन यादव व पुष्पेंद्र यादव उसे जबरन टेंपो में बैठाकर अगवा कर लिया, बाद में ट्रेन से मुंबई लेकर गए। वहां तीनों ने एक जगह बंधक बनाकर सामूहिक दुष्कर्म किया था। वह 26 दिसंबर 2019 को किसी तरह उन लोगों के चंगुल से छूटकर ट्रेन से कानपुर पहुंची और परिजनों को जानकारी दी। छात्रा के बयान के आधार पर पुलिस ने अगवा करने, सामूहिक दुष्कर्म, पाक्सो व एससीएसटी एक्ट की धाराएं बढ़ाकर तीनों भाइयों को 9 जनवरी 2020 को जेल भेज दिया था। घटना की जांच सीओ बीघापुर एके राय को दी गई थी। सीओ ने न्यायालय में आरोप पत्र भी दाखिल कर दिया था।
जिला न्यायालय से जमानत अर्जी खारिज होने पर आरोपियों के परिजनों ने उच्च न्यायालय लखनऊ में अपील की थी। आरोपियों के वकील ने पूरा मामला समझने के बाद जन सूचना अधिकार के तहत डीआईओएस से किशोरी के स्कूल का ब्योरा मांगा। 2 जून 2020 को डीआईओएस ने अपनी रिपोर्ट सौंपी। रिपोर्ट में उन्होंने कहा कि 17 व 18 दिसंबर को किशोरी स्कूल में उपस्थित रही।
इसके बाद वकील की ओर से आरटीआई के जवाब को उच्च न्यायालय में दाखिल कर बताया गया कि खुद को पीड़ित बताने वाली छात्रा ने 11 दिसंबर 2019 से 25 दिसंबर तक मुंबई में रखकर सामूहिक दुष्कर्म के बयान उन्नाव कोर्ट में दिया। जबकि 17 व 18 दिसंबर को उसकी स्कूल में मौजूदगी रही। इसी प्रमाण के आधार पर उच्च न्यायालय ने तीनों आरोपियों को जमानत दे दी। जेल में 15 माह का समय बिताने के बाद मार्च 2021 में आरोपी जमानत पर जेल से बाहर आए। आरोप से घिरे तीनों भाइयों व लखनऊ बार एसोसिएशन के कनिष्ठ उपाध्यक्ष अधिवक्ता मनीष पाल ने किशोरी पर झूठी रिपोर्ट दर्ज कराने का आरोप लगा कार्रवाई की मांग की है।
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वहीं, घटना की विवेचना करने वाले सीओ बीघापुर एके राय ने बताया कि किशोरी के बयान व अन्य तथ्यों के आधार पर आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया गया था।
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