उन्नाव। अकरमपुर में पुलिस पर पथराव और लाठियां चटकाकर ग्रामीणों को खदेड़ने के दूसरे दिन गुरुवार को गांव देवीखेड़ा में ज्यादातर घरों में ताले दिखे। ग्रामीण घरों पर ताले बंद कर पलायन कर गए हैं। दुकानें भी बंद रहीं। हर तरफ सन्नाटा छाया रहा। चप्पे-चप्पे पर पुलिस तैनात रही। एएसपी व सीओ हर गतिविधि जायजा लेते रहे।
देवीखेड़ा गांव निवासी राजेश व विपिन की मौत पर मुआवजे को लेकर बुधवार सुबह जमकर उपद्रव हुआ था। पथराव में 15 पुलिसकर्मी घायल हो गए। इसके बाद पुलिस ने लाठिया चटकाकर लोगों को खदेड़ा था। 100 नामजद व 250 लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर 43 महिला व पुरुषों को गिरफ्तार किया था। पुलिस की इस कार्रवाई के बाद मृतकों के गांव देवीखेड़ा में दहशत फैल गई। गिरफ्तारी के डर से 1500 की आबादी वाले गांव में सौ से अधिक घरों में ताले बंद कर लोग भूमिगत हो गए। गुरुवार को गांव की अधिकतर गलियों में सन्नाटा पसरा रहा। जिन मकानों में ताले बंद नहीं थे उनमें घरों के बाहर महिलाएं या चारपाई पर बुजुर्ग लेटे मिले। पुलिस कार्रवाई के डर से कोई कुछ भी बोलने से बचता रहा।
उपद्रव के बाद एसपी आनंद कुलकर्णी के निर्देश पर बुधवार रात में ही अचलगंज एसओ राघवन कुमार सिंह व एसओ माखी राजेश सिंह के अलावा एक सैकड़ा से अधिक महिला-पुरुष पुलिस कर्मियों को घटनास्थल (अकरमपुर) से मृतकों के गांव देवीखेड़ा के बीच तैनात कर दिया था। पुलिस घटनास्थल से गांव तक गश्त कर हालातों का जायजा लेती रही। गांव में आने-जाने वालों से भी पूछताछ होती रही।
एएसपी शशि शेखर सिंह व सीओ सिटी पुलिस मृतकों के परिजनों से मिले और आश्वस्त किया कि किसी भी बेकसूर को गिरफ्तार नहीं किया जाएगा। पुलिस उपद्रवियों को चिह्नित कर रही है। एएसपी ने गांव में अनाउंसमेंट के जरिए यह संदेश दिया कि पुलिस की दहशत की वजह से घर छोड़कर भागे लोग वापस घर पहुंचे। बेकसूर बिल्कुल न डरें। पूरे प्रकरण में निष्पक्ष कार्रवाई की जाएगी।