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परिवार का बोझ उठाने की जंग हार गया कुली नंबर 44

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उन्नाव। कुली नंबर 44 परिवार का बोझ उठाने की जंग हार गया। कोरोना के दौर में ट्रेनों के पहिये थमे तो कुली बेरोजगार हो गए। मजबूरी में उसने मजदूरी शुरू कर दी। छह नवंबर को निर्माणाधीन दीवार गिरने से वह घायल हो गया था। गुरुवार को उसने दम तोड़ दिया।
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जुराखन खेड़ा निवासी राजकुमार (36) उन्नाव रेलवे स्टेशन पर कुली का काम करता था। उससे पहले उसके पिता कल्लू कुली का काम करते थे। कोरोना के दौरान ट्रेनों का संचालन बंद हुआ तो कुलियों के सामने रोजगार का संकट आ गया। परिवार का पेट पालने के लिए राजकुमार ने मजदूरी शुरू कर दी। छह नवंबर को गांधीनगर में निर्माणाधीन दीवार गिरने से घायल हो गया है। आर्थिक तंगी से पत्नी लक्ष्मी ठीक से इलाज नहीं करा पाई। बुधवार को उसकी मौत हो गई। परिजनों ने गुरुवार को शव का अंतिम संस्कार किया। धर्मेद्र सोनकर सहित अन्य साथियों ने मृतक के परिजनों को सांत्वना दी। रेलवे जिला प्रशासन से पीड़ित परिवार को आर्थिक मदद की मांग की है।
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