जैसे-जैसे मतदान की तारीख नजदीक आ रही है ग्रामीण क्षेत्रों में कच्ची का धंधा बढ़ता जा रहा है। हालात यह हैं कि कच्ची की बढ़ती खपत ग्रामीण क्षेत्रों में चुनाव के दौरान तनाव और आपसी संर्घष का कारण भी बन सकती है। जिले में गंगा कटरी क्षेत्र और सई नदी के किनारे के गांवों में बड़े पैमाने पर कच्ची शराब का धंधा होता है। धंधे से जुड़े सूत्रों के मुताबिक जिले में हर महीने एक लाख लीटर से अधिक कच्ची शराब बनती और खपती है। हालांकि आबकारी और पुलिस विभाग अबतक इससे इनकार करते चले आ रहे थे। लेकिन निर्वाचन आयोग के निर्देश पर शुरू हुई कार्रवाई ने इस अवैध कारोबार की हकीकत खोल दी है। 4 जनवरी से अबतक पुलिस 11443 लीटर अवैध शराब बरामद कर चुकी है। जबकि आबाकारी विभाग अबतक 18241 लीटर अवैध शराब बरामद कर चुका है। कार्रवाई के बावजूद इस अवैध कारोबार पर कोई खास असर नहीं पड़ा है।
लगातार चल रहा है अभियान, एसपी
एसपी नेहा पांडेय ने बताया कि निर्वाचन आयोग के निर्देशानुसार अवैध शराब के खिलाफ जिले में व्यापक स्तर पर अभियान चलाया जा रहा है। उन्होने बताया कि अवैध शराब बरामद करने के साथ ही इससे जुड़े लोगों को जेल भेजा जा रहा है। बताया कि चुनाव में किसी भी दशा में अवैध शराब का इस्तेमाल नहीं होने दिया जाएगा।
जिले में कई बार जाम बना है ‘जहर’
22 अगस्त 2015-शहर कोतवाली क्षेत्र के निंबहरा गांव में कच्ची शराब पीने से 5 लोगों की मौत हुई।
3 जून 2015-की रात शहर के मोहल्ला जुराखन खेड़ा में दो सगे भाईयों समेत पांच की मौत।
12 जनवरी 2015- को हसनंज थानाक्षेत्र के ताला सरांय और लखनऊ के मलिहाबाद थानाक्षेत्र के दतौली में जहरीली कच्ची शराब से तालासरांय गांव के 13 लोगों समेत कुल 45 लोगों की मौत हुई थी।
26 मार्च-2005, बांगरमऊ कोतवाली के असायस गांव में गांव में जहरीली शराब से 7 लोगों की मौत, 5 की आखों की रोशनी गई। घटना में पांच लोगों को उम्रकैद।
वर्ष 2006- आसीवन के अरेरकला गांव में पंचायत चुनाव में प्रत्याशी ने बंटवाई जहरीली शराब से 12 लोगों की मौत, 7 की आंखों की रोशनी चली गई।