नाव से पांडु नदी पार करते ग्रामीण। संवाद
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उन्नाव/बारासगवर। गंगा के जलस्तर में प्रति घंटा .20 सेमी की बढ़ोत्तरी होने से जिले में बाढ़ की आशंका बढ़ गई है। सोमवार को जलस्तर 111.420 मीटर पर पहुंच गया जो चेतावनी बिंदु (112 मीटर) से मात्र .58 सेमी ही दूर है। गंगा के साथ पांडु नदी का भी जलस्तर बढ़ने लगा है। कई गांवों के लोगों को नावों से आवागमन करना पड़ रहा है।
जलस्तर बढ़ जाने से सोमवार को परियर के देवीपुरवा गांव के पास पानी पहुंच गया। इससे क्षेत्र में नाव चलने लगीं। ग्रामीण अपने खेत व अमरूद के बाग जाने के लिए नाव का सहारा लेने लगे हैं। क्षेत्रीय लोगों में बाढ़ आने की शंका से कटरी क्षेत्र में तैयार फसल डूबने का डर सताने लगा है। जलस्तर बढ़ने से हो रही कटान से बक्सर कटरी के गांवों में रहने वाले लोगों के माथे पर चिंता की लकीरें दिखने लगी हैं। कटरी के गांव गढ़ेवा कर्मी, शंभू का पुरवा व धर्मपुर आदि कटान होने से प्रभावित हो रहे हैं। यही नहीं इसकी चपेट में आकर किसानों की सैकड़ों बीघा भूमि कटान में बह गई। ग्रामीणों का कहना है कि जलस्तर ऐसे ही बढ़ता रहा तो बहुत जल्द उन्नाव-कानपुर संपर्क मार्ग कट जाएगा। उधर, सोमवार शाम बीघापुर एसडीएम अंकित शुक्ला ने कटरी क्षेत्र गढ़ेवा में पहुंचकर गंगा के बढ़ते जलस्तर का जायजा लिया। उन्होंने कहा कि लेखपालों को सचेत कर दिया गया है। तहसील प्रशासन के पास किसी भी परिस्थिति से निपटने के लिए पूरी तैयारी है।
तहसील क्षेत्र से निकली पांडु नदी भी उफनाने लगी है। इस कारण गंगा व पांडु नदी के बीच बसी दो ग्रामसभाओं दूलीखेड़ा व लालखेड़ा के ग्रामीणों की मुश्किलें बढ़ने लगी हैं। जलस्तर बढ़ जाने से अब लोगों को नाव के सहारे ही पांडु नदी पार करनी पड़ रही है। वहीं ग्रामीणों द्वारा बनाया गया बांस का पुल भी बह गया है। ग्राम प्रधान श्रीकृष्ण यादव ने बताया कि ग्रामीणों की समस्याओं को लेकर उच्चाधिकारियों से लेकर शासन-प्रशासन तक गुहार लगाई लेकिन अस्थायी रूप से भी कोई व्यवस्था नहीं हुई है। ग्रामीण वीरेंद्र यादव ने बताया कि दर्जनों मजरों के बीच आवागमन पूरी तरह प्रतिबंधित हो गया है।