उन्नाव। केंद्र सरकार द्वारा 15वें वित्त आयोग के माध्यम से ग्राम पंचायतों को 17.36 करोड़ रुपये की धनराशि दी गई है। अब ग्राम पंचायतों को आवंटित सरकारी धन में गोलमाल हो रहा है। कहीं प्रधानों का डोंगल (डिजिटल हस्ताक्षर) बनाने के नाम पर पैसा निकाला जा रहा है तो कहीं विकास कार्यों के एवज में बिना प्रधान की जानकारी के सरकारी धनराशि निकाली गई है।
गंजमुरादाबाद विकासखंड की ग्राम पंचायत दसगवां के नवनिर्वाचित ग्राम प्रधान पुष्पेंद्र सिंह ने तीन दिन पहले बीडीओ को शिकायतीपत्र देकर बताया कि डोंगल बनाने की प्रक्रिया पूरी तो कर ली गई लेकिन कब बना इसकी जानकारी उसे नहीं दी गई। न ही उसे डोंगल दिया गया। कंप्यूटर आपरेटर व अधिकारियों की मिलीभगत से डोंगल के नाम पर 18 हजार रुपये का भुगतान कर लिया।
ग्राम पंचायत हसनगंज में 12 जून को सोलर लाइट व डस्टबिन के नाम पर चार लाख से अधिक का भुगतान कर दिया गया। प्रधान मालती यादव के प्रतिनिधि संदीप यादव का कहना है कि उन्हें इस भुगतान की जानकारी ही नहीं दी गई। नियमानुसार पहले उन्हें डोंगल दिया जाना चाहिए। उसके बाद उनके संयुक्त हस्ताक्षर से ही कोई भुगतान किया जाना चाहिए था। अधिकारियों ने सारे नियम कानून ताक पर रखकर भुगतान कर दिया है। पंचायत सचिव राना का कहना है कि प्रधान का 27 मई को ही डोंगल बन गया था। उनके डोंगल से ही भुगतान किया गया है। आरोप निराधार हैं।
हसनगंज मामले में सचिव को नोटिस देकर जवाब मांगा जाएगा। संतोषजनक जवाब न मिलने पर कार्रवाई होगी। दसगवां का मामला जानकारी में है। जांच में प्रधान का आरोप गलत पाया गया है। राशि स्वयं सहायता समूह की महिलाओं के खाते में भेजी गई है।
-राजेंद्र प्रसाद यादव, डीपीआरओ