इस बार रबी सीजन में लगभग ढाई लाख हेक्टेअर क्षेत्रफल में गेहूं की फसल बोई गई है और 768 मीट्रिक टन गेहूं उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है। शुरुआती समय में फसल के अनुकूल ठंड न पड़ने से गेहूं तेजी के साथ बढ़ नहीं पाया। बीच में कुछ दिनों के लिए ठंड पड़ी लेकिन इसका ज्यादा असर गेहूं की फसल पर नहीं पड़ा। किसानों ने बीच-बीच में पानी लगाकर किसी तरह से गेहूं की फसल को सुधारा लेकिन प्रकृति के साथ न देने से यह ज्यादा फायदेमंद साबित नहीं हुआ। इधर, होली के पहले से ही मौसम में जबरदस्त बदलाव देखने को मिला और तेज हवाओं के साथ गर्मी पड़ने लगी। इसका सीधा असर गेहूं की फसल पर दिखा। तेज गर्मी पड़ने से खेतों में खड़ी गेहूं की फसल समय से पहले ही पकने लगी। मौजूदा समय में हालत यह है कि अधिकांश खेतों में शुरुआती दौर मे बोई गई गेहूं की फसल पूरी तरह से पक चुकी है। ऐसे में किसान अगले सप्ताह तक इनकी कटाई शुरू करने की बात कह रहे हैं। कृषि विषेशज्ञों के अनुसार अममून गेहूं की फसल 90 दिनों में पूरी तरह से पककर तैयार होती है। लेकिन इस बार मौसम के प्रतिकूल होने और समय से पहले तेज गर्मी पड़ने से 75 से 80 दिन में ही फसल पककर तैयार हो गई है। इसका परिणाम गेहूं के उत्पादन पर पड़ सकता है। गेहूं का दाना कमजोर होने से उत्पादन घटेगा। इसको लेकर किसान परेशान नजर आ रहे हैं। उनका कहना है कि समय से पहले तेज धूप निकलने से फसल में पानी ज्यादा लगाना पड़ा। इस बार वैसे भी फसल तैयार करने में लागत ज्यादा लगानी पड़ी है।
इंसेट
पिछले सीजन में ओलावृष्टि से तबाह हुई थी फसल
पिछले रबी सीजन में ओलावृष्टि से गेहूं की फसल तबाह हो गई थी। उस समय भी किसानों को आर्थिक रूप से तगड़ा नुकसान उठाना पड़ा था। इसके बाद खरीफ सीजन में सूखा पड़ गया। इससे धान की फसल भी बर्बाद हो गई थी। अब इस रबी सीजन में फिर मौसम की मार ने बेहाल कर दिया है। इस बार ठंड कम पड़ी और समय से पहले तेज धूप निकलने लगी जिससे गेहूं की बालियां झुलसने लगी हैं। इसके चलते इस बार भी अन्नदाता को फिर प्रकृति की मार से आर्थिक झटका सहने को तैयार रहना होगा।
इंसेट
मौसम में परिवर्तन का दिखेगा असर
यह सही है कि इस बार समय से पहले गेहूं की फसल पक गई है। ऐसे में मौसम का यह परिवर्तन असर दिखाएगा। आशंका है कि इससे गेहूं का उत्पादन भी गिर सकता है। किसानों को मौसम में हुए इस बदलाव को देखते हुए सतर्कता बरतनी चाहिए।- यतींद्र सिंह, जिला कृषि अधिकारी उन्नाव।