उन्नाव। जिला अस्पताल के ब्लड बैंक में एक सप्ताह से ब्लड नहीं है। इस कारण मरीज परेशान हैं। डायलिसिस वाले मरीजों को खून एक ही ग्रुप का डोनर लाने पर ही खून मिल रहा है। जरूरतमंद मरीजों के पर्चे पर ब्लड बैंक प्रभारी आउट ऑफ स्टॉक लिखकर अस्पताल की मुहर लगा देते हैं। वह पर्चा लेकर जरूरतमंद कानपुर उर्सला व हैलट जा रहे हैं।
जिला अस्पताल में बने ब्लड बैंक में 300 यूनिट खून रखने की क्षमता है। लेकिन इस समय ब्लड बैंक में किसी भी ग्रुप का एक भी यूनिट खून नहीं है। कोरोना काल के पहले तक अस्पताल में डायलिसिस यूनिट न होने और कोई न कोई कैंप लगातार आयोजित होने से खून की कमी नहीं होती थी। लेकिन मार्च से कोरोना महामारी आने के बाद कैंप लगाने वालों में भी कमी आई साथ ही डायलिसिस यूनिट भी शुरू कर दी गई। इससे खून की जरूरत अधिक पड़ने लगी और कैंप लगने के साथ खून देने वालों की संख्या भी घटती गई। अब स्थिति यह है कि ब्लड बैंक खाली हो गया है। अगर किसी को खून की जरूरत पड़ती है तो उसे साथ में उसी ग्रुप का डोनर ले जाना पड़ रहा है।
तीमारदारों ने बयां किया दर्द
जिला अस्पताल आए सिंघूपुर निवासी नरेश ने बताया कि वह अपनी वृद्ध मां शांति को लेकर अस्पताल आए। डॉक्टर ने खून की कमी बताई। ब्लड बैंक में खून न होने की बात कही गई। ए-पॉजिटिव का डोनर न होने से खून नहीं मिल पाया। बाद में वह नर्सिंगहोम चला गया। एबी नगर निवासी अमित तिवारी की दादी को पैर में फ्रैक्चर हुआ है। डॉक्टर ने खून की आवश्यकता बताई। वह खून लेने के लिए जिला अस्पताल ब्लड बैंक गए लेकिन वहां खून न होने की बात कहकर लौटा दिया। आवश्यकता के अनुसार बी-पॉजिटिव ग्रुप का डोनर लाने की बात कही।
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कोरोना काल में नहीं आए रक्तदानी
सीएमएस डॉ. बीबी भट्ट ने बताया कि कोरोना काल में लोग रक्तदान करने से पीछे हट गए। कुछ दिन पहले एक धार्मिक संगठन ने कैंप लगाने का आश्वासन दिया था। बाद में मना कर दिया। अब ब्लड बैंक में एक भी यूनिट ब्लड नहीं बचा है। लोगाें से कैंप कराने की अपील की जा रही है।