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बच्चों की प्रतिभा छू रही सफलता का आसमान

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तन्मय। संवाद - फोटो : UNNAO
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उन्नाव। बच्चों का मन और ह्रदय कोमल होता है। वे हर माहौल में ढल जाते हैं। प्रतिभावान बच्चे न केवल बड़ों को कायल बना रहे हैं, बल्कि सफलता का आसामान छू रहे हैं। जिले में भी अपनी प्रतिभा से नाम रोशन करने वाले बच्चों की कमी नहीं है।
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सदर तहसील के गांव राजेपुर निवासी नैंसी सिंह कक्षा 9 की छात्रा है। पिता रमेश सिंह प्राइवेट नौकरी करते हैं। मां संगीता गृहिणी हैं। नैंसी की रुचि को भांपते हुए माता-पिता ने अपनी इकलौती बेटी को डांस कोचिंग कराई। अब वह डांसिंग के क्षेत्र में अपना कैरियर बना रही हैं। उनका चयन शो मेड फॉर स्टेज में हुआ है। ग्वालियर में शूटिंग भी हो चुकी है। जल्द ही मुंबई में फाइनल शूट होगा।
शहर के कब्बाखेड़ा निवासी कक्षा 8 के छात्र तन्मय की अंगुलियां जब ऑर्गन पर थिरकतीं हैं तो श्रोताओं के मन के तार हिल जाते हैं। इनकी प्रतिभा का हर कोई कायल है। तन्मय एक और प्रतिभा का धनी है। 13 वर्ष की उम्र में उन्हें रामचरित मानस की गहन जानकारी है। पिछले माह हुई जिला स्तरीय मानस ज्ञान प्रतियोगिता में तन्मय ने पहला स्थान हासिल किया है। उन्हें गांधी पुस्तकालय में आयोजित संगीत समागम में भी पुरस्कृत किया गया है।
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उन्नाव। शहर के दरोगा बाग मोहल्ले में संचालित मूक बधिर विद्यालय में 42 छात्र मूकबधिर व 40 मानसिक रूप से कमजोर हैं। इन्हें संकेत (साइन) भाषा के माध्यम से पढ़ाया और सिखाया जा रहा है। शारीरिक रूप से कमजोर इन नौनिहालों को सिलाई, कढ़ाई व क्राफ्ट का भी प्रशिक्षण देकर स्वावलंबी बनाया जा रहा है।
कक्षा दो की छात्रा नव्या बोल और सुन नहीं सकतीं लेकिन अपने मजबूत इरादों के जरिए उन्होंने नृत्य में मुकाम हासिल किया है। जिला व प्रदेश स्तर पर प्रतियोगिताओं में भाग लिया और लोगों का दिल जीता। पिछले साल 3 दिसंबर 2020 को विश्व विकलांग दिवस पर लखनऊ में हुई मंडल स्तरीय प्रतियोगिता में नव्या को मुख्यमंत्री ने सम्मानित किया था।
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दिव्यांग अल्सफा का चयन 3 दिसंबर को लखनऊ में होने वाली दिव्यांग बच्चों की नृत्य प्रतियोगिता के लिए हुआ है। शिक्षिका उसे नृत्य की तैयारी करा रही हैं। विद्यालय के निदेशक जैसल ने बताया कि अल्सफा में डांसिंग की विलक्षण प्रतिभा है।
सामाजिक गतिविधियों में अग्रणी अभ्युदय सेवा संस्थान ने मुस्कान घर के माध्यम से गरीब परिवारों के जरूरतमंद बच्चों के चेहरों पर मुस्कान बिखेर रही है। संस्था के अध्यक्ष डॉ. प्रभात सिन्हा लोगों से पुराने कपड़े, खिलौने व अन्य उपयोगी सामग्री एकत्र कर जरूरतमंदों में वितरित करते हैं। संस्था, पढ़ाई के लिए कॉपी-किताबें और खाने के लिए टॉफी-बिस्कुट भी वितरित करते हैं।
उन्नाव। कोरोना की दूसरी लहर ने ऐसा तांडव मचाया कि किसी बच्चे से मां की ममता छिन गई तो किसी के सिर से पिता का साया। वहीं तमाम ऐसे भी रहे जो अनाथ हो गए। जिला प्रोबेशन अधिकारी रेनू यादव ने बताया कि जिले में 70 ऐसे बच्चों को चिह्नित किया जिनके सिर से माता-पिता का साया छिन गया। उन्हें मुख्यमंत्री बाल सेवा योजना का लाभ दिया जा रहा है। जिन बच्चों के पिता की कोरोना से मौत हुई, उनकी मां को निराश्रित पेंशन, पारिवारिक लाभ, समूह से जोड़कर जीविकोपार्जन की व्यवस्था कराई जा रही है। मां की मौत होने पर पिता का ग्रामीण क्षेत्र का होने पर मनरेगा जॉबकार्ड, शहर में श्रमायुक्त कार्यालय से रजिस्टर्ड कराने के साथ ही अन्य योजनाओं का लाभ दिया जा रहा है। साथ ही प्रत्येक बच्चे को 4 हजार रुपये मासिक आर्थिक सहायता दी जा रही है।
उन्नाव। एक पल के लिए भी बच्चे आंख से ओझल हो जाएं, तो माता-पिता का सब कुछ छिन जाता है। कभी नाराज होकर तो कभी भटककर अपनों से दूर हुए बच्चों को उनके परिवार से मिलाकर बाल व अन्य थानों की पुलिस और चाइल्ड लाइन ने चेहरों पर मुस्कुराहट बिखेरी है। दो साल में 81 बच्चों को उनके परिवार से मिलाया गया। 20 बच्चों को सदर कोतवाली में खुले बाल व अन्य थानों की पुलिस व 61 बच्चों को चाइल्ड लाइन ने परिवार तक पहुंचाने में अहम भागीदारी निभाई है।

नैंसी। संवाद- फोटो : UNNAO

मूकबधिर विद्यालय में समूह नृत्य करते दिव्यांग बच्चे। संवाद- फोटो : UNNAO

नाव्या। संवाद- फोटो : UNNAO

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