उन्नाव। सरकार को 60 करोड़ रुपये सालाना टोल टैक्स अदा करने वाली जनता को सुविधाओं के नाम पर एनएचएआई ‘ठेंगा’ दिखा रहा है। राहगीर टोल टैक्स देने के बाद चिकनी व सपाट सड़क पर सफर करने के सपने को कई सालों से संजोए हैं। हाइवे पर अधूरा पड़ा ओवर ब्रिज, जर्जर रायबरेली क्रासिंग, टूटी व गड्ढायुक्त सड़क लोगों के लिए सुगम यातायात में बाधक बनी हुई है।
यहां तक कि टोल टैक्स में भी राहगीरों के लिए पर्याप्त सुविधाएं नहीं हैं। इसके अलावा जगह-जगह पर बने कट भी वाहनों की रफ्तार को बढ़ने नहीं देते हैं। इन सभी खामियों के बावजूद भी बाकायदा राहगीरों से टोल टैक्स की वसूली की जा रही है और लोग भी कोई भी सुविधा न मिलने के बाद भी टैक्स देने के लिए मजबूर हैं।
लखनऊ-कानपुर हाइवे पर उन्नाव में बनी रायबरेली क्रासिंग पर लगने वाला भीषण जाम वाहनों की रफ्तार को ब्रेक लगाता है। इसमें क्रासिंग बंद होने के कारण रोजाना जाम की स्थिति बनी रहती है और इससे निकलने में वाहनों को घंटो का समय लग जाता है।
रायबरेली क्रासिंग पर बीते लगभग पांच साल से बन रहे आरओबी का काम भी अभी तक पूरा नहीं हो सका है। इससे वाहनों को क्रासिंग से होकर जाना भी मजबूरी है।
कानपुर के जाजमऊ पुल को पार करने के बाद लखनऊ तक पहुंचने में यदि बिना रुकावट के जाया जाए तो अधिकतम एक से डेढ़ घंटे का समय लगेगा। जर्जर रायबरेली, सड़क पर बने गड्ढे, जगह-जगह पर फैली गिट्टी व अन्य असुविधाएं इस सफर को लगभग दो गुना बढ़ाकर तीन घंटे का कर देते हैं। इसके अलावा यदि जाम लग जाए तो फिर यह सफर पांच से छह घंटे का भी हो जाता है।
लखनऊ-कानपुर हाइवे पर ग्रीन बेल्ट का भी सपना एनएचएआई की ओर से राहगीरों को दिखाया गया था। लेकिन लोगों के लिए ग्रीन बेल्ट सपना ही रह गई है। 70 किमी के पूरे सफर में शायद ही पांच-दस किमी में पौधे लगे हों बाकी पूरी बेल्ट बिना पौधों के ही बनी हुई है।
वर्जन
कंपनी को कानपुर से लेकर अयोध्या के बीच पड़ने वाले तीन टोल प्लाजा का ठेका मिला है। उनकी कंपनी को इन तीनों टोल प्लाजा का 171 करोड़ रुपये सालाना अदा करना होता है। जिसमें एक टोलटैक्स पर साल भर का लगभग 57 करोड़ रुपये खर्च आता है। वसूली एक टोल टैक्स से सालाना करीब 60 करोड़ रुपये होती है। - रवि चतुर्वेदी, कानपुर-अयोध्या टोल-वे प्राईवेट लिमिटेड के एजीएम
वर्जन
मुझे पूरी जानकारी नहीं है लेकिन जैसा हाइवे लखनऊ से कानपुर के बीच बना हुआ है इसमें लगभग 7-8 करोड़ रुपये प्रति किमी के हिसाब से खर्च आता है। इस हाइवे की दूरी लगभग 70 किमी है। इस हिसाब से पूरे हाइवे के निर्माण में लगभग 560 करोड़ रुपये का खर्च आया होगा।- शिवशंकर, परियोजना निदेशक, एनएचएआई, लखनऊ।