उन्नाव। स्वास्थ्य विभाग के सहायक निदेशक (एडी) ने गुरुवार को जिला अस्पताल का औचक निरीक्षण किया तो उन्हें जिला महिला और पुरुष अस्पताल के सीएमएस अनुपस्थित मिले। पांच डॉक्टर भी ओपीडी में नहीं थे। सभी को सुधार की हिदायत देते हुए स्पष्टीकरण मांगा है।
जिला महिला और पुरुष अस्पताल में मरीजाें को घंटों इंतजार के बाद इलाज मिलता है। डॉक्टरों की लेटलतीफी मरीजों पर भारी पड़ रही है। समस्या को अमर उजाला ने 21 मई के अंक में प्रमुखता से उठाया था। इस पर स्वास्थ्य विभाग के सहायक निदेशक डॉ. जीपी गुप्ता गुरुवार सुबह आठ बजे अचानक जिला अस्पताल पहुंचे। पर्चा काउंटर पर उन्हें मरीजों की लंबी लाइन मिली। उन्होंने काउंटर बढ़ाकर पर्चा बनाने में तेजी लाने के निर्देश दिए।
इसके बाद ओपीडी गैलरी पहुंचे तो फिजीशियन सहित चार डॉक्टर अनुपस्थित मिले। इसके बाद एडी, अल्ट्रासाउंड कक्ष पहुंचे तो वह बंद मिला। बताया गया कि डॉक्टर छुट्टी पर हैं। पुरुष अस्पताल के सीएमएस डॉ. आरए मिर्जा भी कार्यालय में नहीं मिले। इसके बाद सभी डॉक्टरों के ओपीडी और उपस्थिति रजिस्टर चेक किए। बाद में जनरल वार्ड पहुंचकर मरीजों से उनका हालचाल लिया और दवा मिलने व इलाज की जानकारी ली। इसके बाद महिला अस्पताल पहुंचे तो यहां भी सीएमएस डॉ. अरविंद आनंद नहीं मिले। फिर महिला अस्पताल की ओपीडी को चेक किया। डॉ. अल्का के कक्ष में पहुंचे तो बताया गया कि छुट्टी पर हैं। यहां भी उन्होंने ओपीडी रजिस्टर की जांच की।
जिला महिला अस्पताल के किचन में एडी को गंदगी और चप्पल पहने हुए खाना बनाते रसोइया मिली। इस पर उन्होंने फटकार लगाई और सुधार करने के निर्देश दिए। इसके अलावा, उन्हें सब्जी में केवल आलू मिलने पर मौसमी सब्जियों की व्यवस्था करने की बात कही। वहीं, पोस्टमार्टम हाउस में गंदगी मिलने पर उन्होंने सफाई कराने के निर्देश दिए।
ओपीडी रजिस्टर में गड़बड़ी
जिला अस्पताल में सहायक निदेशक ने सभी डॉक्टरों के ओपीडी रजिस्टर चेक किए। इसमें कई डॉक्टर ऐसे मिले जिनके रजिस्टर में 17 दिन मरीज ही नहीं देखे गए। इस पर उन्होंने रजिस्टर की फोटो खींची और डॉक्टराें के नाम नोट किए। इसके अलावा उन्होंने डॉ. सुनीता को बुलाकर करीब 20 मिनट तक पूछताछ की। इसके बाद अन्य स्वास्थ्य कर्मियों से पूछताछ करते रहे।
बोले सहायक निदेशक
सहायक निदेश स्वास्थ्य डॉ. जीपी गुप्ता ने बताया कि अनुपस्थित मिले दोनों सीएमएस और डॉक्टरों से स्पष्टीकरण मांगा गया है। संतोषजनक कारण न होने पर उचित कार्रवाई की जाएगी। सभी डॉक्टरों के ओपीडी रजिस्टर और रोस्टर का मिलान किया जाएगा। गड़बड़ी मिलने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।