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एआरटीओ कार्यालय में कर्मचारी को पीटा

Thu, 26 Feb 2015 12:22 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, उन्नाव
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उन्नाव। एआरटीआे कार्यालय में बुधवार को अस्थायी परमिट की फाइल पास न करने पर एक बस मालिक ने प्राइवेट कर्मचारी को पीट दिया।
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मामला पहुंच वालों का होने के कारण वहां न तो कोई बाबू उसे बचाना आया और न ही एआरटीआे प्रशासन ने इस ओर कोई कार्रवाई की। कर्मचारी व्यथा सुनाने अधिकारी के पास भी गया लेकिन वह मामले से अंजान होने की बात कहकर साफ मुकर गईं।

एआरटीआे कार्यालय में प्रत्येक बाबू के साथ एक प्राइवेट कर्मचारी काम कर रहा है। यहां बाबू तो अपना काम छोड़कर बीच से चले जाते हैं लेकिन प्राइवेट कर्मचारी सीट पर बैठा रहता है।
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बुधवार को एक बस मालिक एआरटीओ कार्यालय पहुंचे। उन्होंने बस का परमिट होने की जानकारी ली। सीट पर बैठे प्राइवेट कर्मचारी ने बताया कि फाइल में रूट सही अंकित न होेने के कारण परमिट नहीं मिल पाई है। इस पर उनका गुस्सा सातवें आसमान पर चढ़ गया और उन्होंने प्राइवेट कर्मचारी को मारना शुरू कर दिया।

मारपीट की जानकारी होने पर परमिट सीट देख रहे बाबू सुरेशचंद्र शुक्ला जब लौटकर आए तो उन्होंने कर्मचारी को मामले की शिकायत करने के लिए एआरटीओ प्रशासन के पास भेजा। उसने जाकर अपनी व्यथा भी सुनाई लेकिन कुछ नहीं हुआ।

बताया जाता है कि बस मालिक के कई लोग एआरटीओ कार्यालय में दलाली भी करते हैं। इतना ही नहीं सत्तापक्ष का मामला होने के कारण कोई कुछ कहता भी नहीं है।

परमिट देख रहे बाबू सुरेशचंद्र शुक्ला ने बताया कि अस्थाई परमिट कैसे दिया जाता जब रूट ही सही निर्धारित नहीं था। फाइल पर चिलौली से झंगरपुर, झंगरपुर से डलमऊ व बाराबंकी लिखा हुआ था। ऐसे में किस रूट के लिए परमिट दिया जाता। यह साफ अंकित नहीं था इस कारण परमिट नहीं दिया गया।

इसके पहले भी यहां हो चुकी है मारपीट व हवाई फायरिंग
उन्नाव। एआरटीओ कार्यालय में मारपीट होना कोई नई बात नहीं है। इसके पहले भी यहां दलाल आरआई से हाथापाई कर चुके हैं तब भी कोई कार्रवाई नहीं हुई थी। अभी हाल में कार्यालय के बाहर दलालों ने हवाई फायरिंग भी की थी लेकिन कुछ नहीं हुआ।

क्या बोले जिम्मेदार
एसडीएम सदर जसजीत कौर ने बताया कि किसी भी कर्मचारी को मारना गलत है। इसमें एआरटीओ प्रशासन से बात की जाएगी और कार्यालय की स्थिति का जायजा लेने के लिए औचक निरीक्षण भी किया जाएगा।
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एआरटीओ प्रशासन माला बाजपेई तो इस मामले अंजान ही बनी रहीं। उनका कहना था कि मामला हमारी जानकारी में नहीं आया। बाबू के साथ परमिट देख रहा कर्मचारी हमारे पास आया तो था लेकिन उसने कुछ बताया नहीं।
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