शुक्लागंज। जिले के लोगों की नींद हराम करने वाला बाघ अब गंगाघाट क्षेत्र में प्रवेश कर गया है। इस बीच वह वापस पिंजरे की ओर नहीं लौटा, बल्कि उसने दो नीलगायों को अपना शिकार बनाया। गंगाघाट इलाके में बाघ के पदचिन्ह मिलने के बाद अब कांबिंग में लगी टीम उसी इलाके की ओर बढ़ रही है। गंगाघाट पुलिस ने इलाके के लोगों को सतर्क रहने को कहा है। साथ ही बैराज पुलिस को भी सतर्क कर दिया गया है।
वाइल्ड लाइफ और वन विभाग की संयुक्त 11 टीमें लगातार जंगल में छानबीन कर रही है। सोमवार को बाघ के गढ़ी सिलौली से गंगौली होते हुए शंकरपुर सराय होने की जानकारी मिली थी। इस पर टीम ने पिंजरे का स्थान बदल दिया था। जंगल के बीच लगाए गए पिंजरे में बाघ को लालच देने के लिए पड़वा बांधा गया था, लेकिन बाघ टीम के चक्कर में फंसने के बजाय आगे बढ़ता जा रहा है। वह चारे के लालच में पिंजरे की ओर नहीं लौटा बल्कि आगे बढ़ गया। मंगलवार को उसके पद्चिन्ह गंगाघाट इलाके में पाए गए हैं। माना जा रहा है कि बाघ वापस लौटने के बजाय लगातार आगे बढ़ रहा है। पिपरी गांव में कांबिग करके वापस लौटने पर वाइल्ड लाइफ ट्रस्ट के डॉ. सौरभ सिंघई ने बताया कि बाघ को जिंदा पकड़ने की कोशिश की जा रही है। कुर्मीखेड़ा में पिंजरा लगाया गया है, जिसके इर्द गिर्द आठ नाइट विजन हिडेन कैमरे लगाए गए हैं। पिपरी के ग्रामीण छंगा, रामनारायण, नन्हें आदि ने बताया कि खेत में पैरों के निशान बैराज की ओर जाते हुए बने हैं जबकि लौटने के कोई निशान नहीं है। कांबिंग के दौरा शंकरपुर स्थित काली माता मंदिर के निकट स्थित एक खेत व शंकरपुर पेट्रोलपंप के निकट स्थित खेत मेें दो नील गायों को शव मिले, जिन्हें बाघ ने मारा डाला है।
आदमखोर नहीं इसलिए राहत
वाइल्ड लाइन के रिटायर्ड रेंजर आफ ताब वली खान ने बताया कि बाघ अभी आदमखोर नहीं हुआ है। जब तक उसके मुंह में आदमी का खून नहीं लगता तब तक राहत होगी। एक बार खून लगने के बाद वह जानवरों के बजाए इंसानों का शिकार करने लगेगा।
खेत में मिले पंजों के निशान
पिपरी के अनिल पुत्र रामऔतार ने बताया कि मंगलवार सुबह जब वह खेत में आए तो बड़े पंजों के निशान देखे जिसकी सूचना उन्होंने गांव से कुछ दूरी पर डेरा डाले वाइल्ड टीम के लोगों तक पहुंचाई। मौके पर निरीक्षण करने पहुंचे वन विभाग के डिप्टी रेंजर एसके श्रीवास्तव ने टाइगर के पैरों के निशान होने की पुष्टि की, जिसके बाद टीम के लोगों ने यहां कांबिंग भी की।
जंगल में की बाघ के खाने-पीने की व्यवस्था
उन्नाव। वन विभाग और वाइल्ड लाइफ की टीम अब बाघ के गढ़ी सिलौली के जंगल में लौटने का इंतजार कर रही है। मंगलवार को जंगल के अंदर के रास्तों में झाड़ू लगाकर सफाई की गई। साथ ही बाघ के लिए पानी और खाने की व्यवस्था की गई है। मंगलवार को बाघ को पकड़ने के लिए लगाई गईं 11 टीमों ने कुमरिया खेड़ा, पिपरी, शंकरपुर सरांय, कुर्मिनखेड़ा, अगेहरा, कनिकामऊ, हाजीपुर अगेहरा, गंगा बैराज आदि गांवों के जंगलों और खेतों की खाक छानी फिर भी कामयाबी नहीं मिली। इस पर टीम ने अपना ध्यान पुन: गढ़ी सिलौली पर केंद्रित कर दिया है। अधिकारियों को बाघ के दुबारा यहां आने की उम्मीद है। टीम ने गढ़ी सिलौली स्थित जंगल के रास्तों में झाडू लगाकर रास्तों में पूर्व में बने चिन्हों को मिटाया। बाघ के लौटने का इंतजार कर रही टीम ने बाघ के लिए खाना और पीने के लिए पानी की व्यवस्था भी की है। वन विभाग के फारेस्टर राजीव मिश्रा ने बताया कि बाघ पकड़ने के लिए मंगलवार को 11 टीमों ने कांबिंग की है। बाघ को पकड़ने के लिए फिर से गढ़ी सिलौली के जंगल पर काम किया जा रहा है इसलिए जंगल के रास्तों की सफाई करके वहां पर पानी और खाने की व्यवस्था की गई है।