उन्नाव। धरती के भगवान डाक्टरों की इंसानियत मर गई है। मरीजों की गंभीर स्थिति देखकर भी उनका दिल नहीं पसीज रहा है। जिला अस्पताल में मंगलवार को गर्भवती को जांच कार्ड न होने पर चिकित्सकों ने अस्पताल से निकाल दिया। पीड़िता ने आरोप लगाया कि अस्पताल कर्मियों ने प्रसव कराने के नाम पर उससे रुपये मांगे थे। रुपये न देने पर उसे बाहर कर दिया। पीड़िता के पति ने मामले की शिकायत डीएम से की है।
अचलगंज थानाक्षेत्र के करौंदी गांव निवासी पप्पी पत्नी दिनेश को प्रसव पीड़ा होने पर मंगलवार रात जिला अस्पताल में भर्ती कराया था। यहां बुधवार सुबह चिकित्सकों ने पप्पी से जांच कार्ड दिखाने को कहा। पप्पी ने जांच कार्ड न होने की बात कही। पप्पी के अनुसार जांच कार्ड न होने की बात सुनकर चिकित्सकों ने उससे कहीं और जाने को कहा। पप्पी के परिजनों ने चिकित्सकों से निजी अस्पताल जाने में असमर्थता जताई लेकिन चिकित्सकों ने उसकी नहीं सुनी। जिला अस्पताल से बाहर निकालने के बाद परिजनों ने पप्पी को एक नर्सिंग होम में भर्ती कराया, जहां देर रात उसका सुरक्षित प्रसव हुआ और उसने एक लड़के को जन्म दिया। जिला अस्पताल में महिला चिकित्सकों के रवैय्ये से आहत दिनेश ने बुधवार को डीएम कार्यालय पहुंचकर महिला चिकित्सकों की शिकायत की। आरोप लगाया कि जांच कार्ड न होने के नाम पर उसकी पत्नी को अस्पताल से बाहर भगा दिया गया। इसके साथ ही उससे पांच हजार रुपये भी मांगे गए।
मुझे नहीं मामले की जानकारी
महिला सीएमएस डॉ. सरोज श्रीवास्तव ने बताया कि जांच कार्ड होने से महिला को किसी तरह की बीमारी है या नहीं साथ ही उसे समय से टीके आदि लगे हैं कि नहीं इसकी जानकारी हो जाती है। ऐसे में प्रसव के दौरान चिकित्सकों को कोई समस्या नहीं होती। बताया कि जांच कार्ड न होने पर मरीजों को वापस नहीं लौटाया जाता। साथ ही उन्हें ऐसे किसी मामले की जानकारी नहीं है।
जांच कराकर करेंगे कार्रवाई
डीएम सौम्या अग्रवाल ने बताया कि मामले की जांच कराने के बाद कार्रवाई की जाएगी। उन्हें इस तरह की कई शिकायतें मिल चुकी हैं।