उन्नाव। रहमत, बरकत और मग्फिरत का माहे रमजान अपने साथ अल्लाह की तमाम नेमतें लेकर आता है। अल्लाह रब्बुल इज्जत ने रोजेदार के लिए पंाच ईनाम रखे हैं। कयामत के दिन रोजेदाराें को जब ये ईनाम मिलेंगे तो रोजा न रखने वाले अफसोस करेंगे कि काश हमने भी रोजा रखा होता।
रोजे की अहमियत और उसकी फजीलत के बारे में यह बात तकी नगर मदीना मस्जिद के इमाम कारी तौसीफ रजा ने कही। उन्होंने बताया कि साहबा एकराम हजरत अबू बक्र हुरैरा रजि. से रिवायत है कि अल्लाह ने रोजेदार के लिए पांच ईनाम मख्सूस किए। पहला ईनाम रोजेदार के मुंह से आने वाली बू अल्लाह को मुश्क (कस्तूरी) से भी प्यारी है। दूसरा ईनाम यह है कि रोजेदार का रिज्क (भोजन) का जिम्मा खुद अल्लाह तआला अपने हाथ ले लेता है। कारी तौसीफ रजा ने कहा कि यही वजह है कि बंदे को रमजान मुबारक में जो कुछ खाने को मिलता है, वह साल भर में शायद कुछ खास मौकों पर ही मिले। तीसरा ईनाम इस माह अल्लाह पाक शैतान को कैद कर देता है। कारी रजा ने बताया कि यही कारण है कि इस माह मेें बंदा अपनी बुराइयां छोड़कर सिर्फ अल्लाह की इबादत में लग जाता है। चौथा ईनाम यह कि रोजेदार की बेहतरी के हक में मछलियां दुआ करती हैं। बताया कि अगर कोई मख्लूक (सृष्टि की कोई भी रचना) बंदे के लिए दुआ करता है तो अल्लाह उस बंदे के सैकड़ों गुनाह माफ कर देता है। दुनिया में अनगिनत मछलियां हैं। अल्लाह इन मछलियों को अपने रोजेदार बंदे के हक में दुआ के लिए तैनात कर देता है। जब एक की दुआ से सैकड़ों नेमतें मिलती हैं तो अनगिनत मछलियों की दुआओं का बदल बंदे की सोच के बाहर की बात है। इसका अज्र सिर्फ अल्लाह ही जानता है। बताया कि पांचवां ईनाम सबसे अहम है अल्लाह अपने रोजेदार बंदे के लिए जन्नत को आरास्ता (सजावट) करता है। बताया कि कयामत (निर्णायक दिन) के दिन यही रोजे और कलामे पाक बंदे की हिफाजत करेंगे और अल्लाह जल्ले जलालहू की बारगाह में बंदे के हक में गवाही देंगे। उन्होंने सभी लोगों से रोजा और नमाज पाबंदी से अदा करने की अपील करते हुए कहा कि ऐसा करने से अल्लाह की नेमतों के साथ इन पांच मख्सूस ईनाम के हकदार बनें।