उन्नाव। पिछड़े जिलों की फेहरिस्त में शामिल उन्नाव में विकास की आस घोटाले की भेंट चढ़ गई। वित्तीय वर्ष 2010-11 में स्वीकृत हुई 37 करोड़ 73 लाख की कार्य योजना में इस कदर घोटाले किए गए कि केंद्र सरकार ने सभी कामों पर रोक लगा दी। वित्तीय वर्ष 2011-12 में जिला पंचायत द्वारा प्रदेश और केंद्र सरकार को भेजी गई करीब 25 करोड़ की कार्य योजना एक साल बाद भी स्वीकृत नहीं हुई।
वित्तीय वर्ष 2006-07 में केंद्र सरकार द्वारा पिछड़े जिलों के विकास के लिए शुरू की गई पिछड़ा क्षेत्र विकास निधि योजना तमाम कोशिशों के बाद वर्ष 2009-10 में जिले में लागू हो पाई। शुरुआती चरण में योजना के तहत ग्रामीण व शहरी क्षेत्र के विकास के काफी काम भी हुए। मगर जिला पंचायत द्वारा कराए गए विकास कार्यों में बड़े पैमाने पर हुए घालमेल के चलते यह योजना जिले के विकास में सहारा नहीं बन पाई। घोटाले सामने आने के बाद केंद्र सरकार ने जांच शुरू की और कराए जा रहे कार्यों पर रोक लगा दी। हालांकि जिला पंचायत ने वर्ष 2011-12 में बीआरजीएफ के तहत 24 करोड़ 55 लाख 82 हजार के विकास कार्य कराए जाने की जरूरत समझी और जिला योजना की बैठक में सर्व सहमति से स्वीकृति देते हुए प्रदेश और केंद्र सरकार को स्वीकृति तथा बजट आवंटन के लिए भेजी गई। लेकिन सामने आ रहे एक के बाद एक बड़े घोटालों के चलते केंद्र सरकार ने उन्नाव जिले को इस योजना में धन आवंटन पर रोक लगा दी। इसी का नतीजा है कि विकास में पिछड़े उन्नाव के लोगों की विकास की आस पूरी नहीं हो पाई।
क्या कहते हैं जिम्मेदार
जिला पंचायत के अपर मुख्य अधिकारी हरिपाल यादव ने बताया कि पूर्व में स्वीकृत हुए विकास कार्यों पर केंद्र सरकार ने रोक लगाई है। इन विकास कार्यों में गड़बड़ी की शिकायत पर सरकार ने जांच शुरू की है। इसी के चलते पुराने काम रोक दिए गए हैं। बीआरजीएफ की नई कार्य योजना के बाबत उन्होंने बताया कि कार्य योजना तैयार कर प्रदेश सरकार को और प्रदेश सरकार केंद्र सरकार को भेजकर उनकी स्वीकृति लेती है। उन्होंने बताया कि इंतजार किया जा रहा है जैसे ही वार्षिक योजना स्वीकृत होगी तेजी से विकास कार्य कराए जाएंगे।