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पांच साल बीत गए पूरा नहीं हो सका काम

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उन्नाव। डौड़ियाखेड़ा नहर पंप परियोजना पांच साल पहले शुरू हुई थी, लेकिन अभी तक पूरी नहीं हुई। जबकि वर्ष 2007 में शुरू हुई 33 करोड़ 99 लाख 64 हजार लागत वाली यह परियोजना वर्ष वर्ष 2009-10 में पूर्ण हो जानी थी। परियोजना से जुड़े अधिकारी इसके लिए समय से धन न मिलने और डिजायन तैयार न होने की बात कर रहे हैं। उधर, ज्यादा अवधि बीतने के साथ ही परियोजना की लागत भी करीब पौने दो गुना बढ़ चुकी है। ऐसे में लागत बढ़ना भी इस योजना के पूरा होने में बाधा साबित हो रहा है। नहरों के पानी से सिंचाई पर निर्भर किसान टकटकी लगाए हैं कि कब यह परियोजना पूरी हो और उनकी फसलों को भरपूर सिंचाई का पानी मिल सके। परियोजना का काम पूरा न होने से जिले में हर साल कई सौ हेक्टेयर खेत सिंचाई से वंचित रह जाते हैं।
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जिले के करीब दौ सौ वर्ग किलोमीटर क्षेत्र को सींचने के लिए एक दशक पहले डौड़िया खेड़ा डलमऊ नहर में अस्थाई पंप स्टेशन स्थापित किया गया था। इस स्टेशन में छह पंप लगाए गए थे जो 300 क्यूसेक (घन फुट प्रतिसेकेंड) की क्षमता से पानी नहर में प्रवाहित करते थे। समय के साथ-साथ इस अस्थाई पंप स्टेशन की क्षमता घट कर मात्र 125 क्यूसेक (घन फुट प्रतिसेकेंड) रह गई। इससे करीब 60 प्रतिशत भूक्षेत्र तक पानी नहीं पहुंच पा रहा था।
इस पर सिंचाई विभाग ने डौड़िया खेड़ा में नया स्थाई पंप स्टेशन बनाने की कार्य योजना तैयार की थी। कार्ययोजना के तहत डौड़िया खेड़ा में 50 क्यूसेक क्षमता के छह पंप वाला स्थाई पंप स्टेशन और इसको बिजली आपूर्ति के लिए 32 केवीए का विद्युत सब स्टेशन बनाया जाना था। 33 करोड 99 लाख 64 हजार लागत वाली इस योजना की शुरूआत वित्तीय वर्ष 2007 में हुई। वित्तीय वर्ष 2009-10 में यह परियोजना बन कर तैयार हो जानी चाहिए थी। परियोजना के निर्माण का जिम्मा उत्तर प्रदेश राजकीय निर्माण निगम को और आर्थिक जिम्मेदारी नाबार्ड को सौंपी गई थी। वित्तीय वर्ष परियोजना पूर्ण होने का समय समाप्त हुए दो साल से अधिक बीत चुके हैं लेकिन अभी भी पंप स्टेशन का कार्य 30 प्रतिशत से अधिक पूरा नहीं हो सका है। विद्युत सब स्टेशन निर्माण का काम तो इसी वर्ष मई माह में शुरू हुआ हुई है। सिंचाई विभाग के ड्राफ्ट मैन रजनीश ने बताया कि में नाबार्ड ने समय से पैसा उपलब्ध नहीं कराया, इसलिए परियोजना काफी पीछे हो गई। उन्होंने बताया कि अब परियोजना की लागत बढ़ कर करीब सत्तावन करोड़ हो चुकी है। उधर, सिंचाई विभाग के एक्सईएन जयपाल बताते हैं कि पंप स्टेशन का डिजायन ही तैयार होकर राजकीय निर्माण निगम को वित्तीय वर्ष 2009-10 में मिला इसलिए परियोजना निर्माण मेें देरी हो गई। बताया कि नाबार्ड अभी तक परियोजना को करीब 21 करोड़ रुपया दे चुका है।
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