उन्नाव। लोकसभा चुनाव की आचार संहिता के फेर में 18.5 करोड़ के सड़क निर्माण के टेंडर फंस गए हैं। इसमें सबसे ज्यादा काम ग्रामीण अभियंत्रण सेवा (आरईएस) विभाग के हैं। चुनावी प्रक्रिया शुरू होने के बाद अब यह काम नहीं कराए जा सकेंगे। इससे आम जनता को अगले दो माह तक खस्ताहाल मार्गों पर ही सफर करना पड़ेगा।
रविवार की शाम को लोकसभा चुनाव 2019 की आचार संहिता लागू हो गई। जिले में 29 अप्रैल को मतदान और 23 मई को मतगणना होगी, जब तक वोटों की गिनती पूरी नहीं होगी तब तक आचार संहिता लगी रहेगी। इस दौरान कोई भी निर्माण व विकास संबंधी नए काम नहीं हो सकेंगे। आचार संहिता के चक्कर में आरईएस के 17 करोड़ के टेंडर फंस गए हैं।
पूर्व में सूबे के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हर विधानसभा के खस्ताहाल मार्गों के लिए 5 करोड़ की धनराशि दी थी। सभी विधायकों से प्रस्ताव मांगे गए थे। इसमें पुरवा, भगवंतनगर, सफीपुर व सदर विधायकों के प्रस्ताव स्वीकार होकर धनराशि भी जारी हो गई थी, लेकिन टेंडर प्रक्रिया में समस्या आ गई। कुछ कार्यों के लिए महज एक टेंडर पड़ा तो दोबारा फिर से टेंडर निकालने की प्रक्रिया शुरू की गई, लेकिन आचार संहिता लागू होने से यह ठप हो गया। वहीं, बांगरमऊ व मोहान के लिए धनराशि 8 मार्च को जारी हुई।
विभाग टेंडर कराता तब तक चुनाव की घोषणा हो गई। एक्सईएन आरईएस बीके राजपूत ने बताया कि चार विधानसभाओं के 20 करोड़ के काम फाइनल हुए थे। हालांकि टेंडर प्रक्रिया पूरी न हो पाने से 7 करोड़ के काम फंस गए। वहीं मोहान, बांगरमऊ के 5-5 करोड़ के सड़क निर्माण के कार्य एक भी शुरू नहीं हो पाएंगे। वहीं नगरीय निकायों में होने वाले सड़क निर्माण के 13 कार्यों के शुरू होने पर भी आचार संहिता का ग्रहण लग गया है। पीओ डूडा विजया तिवारी ने बताया कि करीब डेढ़ करोड़ के कार्य आचार संहिता में फंस गए हैं। इन्हें चुनाव बाद टेंडर निकालकर कराया जाएगा।