बारिश के बाद उत्पादन शुरू करने की तैयारी कर रहे जिले के ईंट भट्ठा संचालकों को प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से बड़ा झटका लगा है। मानकों पर खरे न उतरतने वाले जिले 44 ईट भट्ठों को बंद करने का नोटिस दिया गया है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी ने बताया कि बंद करने का नोटिस भट्ठों पर चस्पा कराया जा रहा है।
जिले में ढाई सौ से अधिक ईंट भट्ठा संचालित हैं। इनमें कई आबादी क्षेत्र तो कई फल पट्टी क्षेत्र में नियमों को ताक पर रखकर चलाए जा रहे हैं। वायु प्रदूषण नियंत्रण के मानकों पर खरे न उतरने वाले 44 ईंट भट्ठों को प्रदूषण नियमंत्रण बोर्ड ने बंदी का नोटिस थमा रहा है। जिन भट्ठों को बंदी का नोटिस दिया गया है उनमें ज्यादातर तहसील हसनगंज, बांगरमऊ, सफीपुर और सदर क्षेत्र के हैं।
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी राधेश्याम ने बाताया कि न्यायालय के आदेश पर यह कार्रवाई की जा रही है। इन ईंट भट्ठा संचालकों ने प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से कभी ईसी (इनवायरमेंट क्लियरेंस) लिया ही नहीं है। सभी वर्षों से अवैध रूप से चलाए जा रहे थे। उन्होंने बताया कि जो भट्ठा संचालक मानक पूरे होने का प्रमाण देंगे और वह जांच में बोर्ड के तय मानकों के अनुरूप पाए जाएंगे उन्हें उत्तर प्रदेश प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड संचालन की अनुमति देगा। बताया कि कार्रवाई के दायरे में आए यह सभी 44 भट्ठे अब नहीं चल पाएंगे। अगर कोई चोरी छिपे चालाता है तो उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई जाएगी साथ ही जुर्माना की भी कार्रवाई की जाएगी।
यह हैं प्रमुख मानक
-नगर निकाय से पांच किमी के दायरे में न हो।
-इसके बाहर 100 से 150 आबादी क्षेत्र से 500 मीटर दूर हो।
- बस्ती या गांव की आबादी 150 से अधिक है तो भट्ठा की दूरी 1 किमी जरूरी है।
-अस्पताल, स्कूल, सार्वजनिक भवन एक किमी दूरी हो।
-रेलवे ट्रैक से 200 मीटर और हाईवे से 300 मीटर दूरी हो।
-राख को हवा में फैलने से रोकने के लिए उच्च तकनीक की चिमनी लगी हो।
- ध्वनि प्रदूषण से सुरक्षा के लिए चारों ओर दोहरी दीवार हो।