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एमएसएमई की 9 औद्योगिक इकाइयों को 34 लाख का अनुदान

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उन्नाव। सूक्ष्म एवं लघु उद्योग (एमएसएमई) श्रेणी की औद्योगिक इकाइयों को विदेशों में निर्यात के लिए भेजे गए माल को पोर्ट तक पहुंचाने के एवज में किराए के रूप में 34.14 लाख रुपये दिए जाएंगे। डीएम ने उद्योग केंद्र के अधिकारियों को जल्द भुगतान करने के आदेश दिए हैं।
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कलक्ट्रेट में डीएम रवींद्र कुमार की अध्यक्षता में यूजर्स कमेटी की बैठक हुई। इसमें निर्यातकों द्वारा गेटवे पोर्ट तक निर्यात के लिए भेजे गए माल के किराए पर व्यय धनराशि की प्रतिपूर्ति को दिए जाने वाले अनुदान पर चर्चा हुई। डीएम को बताया गया कि एमएसएमई से जुड़ी 9 औद्योगिक इकाइयां जुड़ी हुई हैं। इन्हें किराए के रूप में 34.14 लाख रुपये दिए जाएंगे।
जानकारी दी गई कि यह अनुदान सूक्ष्म एवं लघु उद्योग श्रेणी के समस्त औद्योगिक इकाइयों को दिया जाता है। इकाइयों द्वारा उत्पादित माल को निर्यात के लिए इनलैंड कंटेनर डिपो या कंटेनर फ्रेट स्टेशन के माध्यम से गेटवे पोर्ट
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तक पहुंचाने पर दिए जाने वाले किराए की प्रतिपूर्ति शासन द्वारा दी जाती है। इसमें किराए का 25 प्रतिशत अथवा अधिकतम 6000 रुपये प्रति 20 फिट कंटेनर और 12000 रुपये प्रति 40 फिट कंटेनर में जो भी कम हो उसके अनुसार दिया जाएगा। ऐसी औद्योगिक इकाई जो सालाना 12 लाख का निर्यात करती है उसे ही अनुदान मिलेगा।
औद्योगिक इकाई द्वारा अपना उत्पाद निर्यात को विदेशी क्रेता को भेजे जाने के लिए शिपमेंट की तिथि से अधिकतम 180 दिन के अंदर क्लेम का दावा हर दशा में जिला उद्योग केंद्र में दाखिल करना अनिवार्य है। इस अवधि के बाद दाखिल दावे निरस्त माने जाते हैं।
निर्यातक इकाइयों के प्रतिनिधि में मेसर्स रिमझिम स्टेनलेस लि. के विजय गर्ग, मेसर्स एसीआई ऑयल्स के निदेशक हर्षवर्धन अग्रवाल, इमरान सिद्दीकी, डीजीएम मेसर्स रुस्तम फूड्स लि., मेसर्स मैश एर्गो लि. के फराज रईस, इंडारगो के नीरज त्रिवेदी, सदफ इंटरनेंशन के केवी सिंह, मेसर्स रहमान इंडिया लि. के जमाल नासिर खान, एचपीसीएल के इस्माइल हुसैन, उपायुक्त उद्योग करुणा राय मौजूद रहे।
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