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लापरवाही की हद : बीएसए ‘गोष्ठी’ का आयोजन ही भूले

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उन्नाव। बेसिक शिक्षा विभाग के अफसरों की लापरवाही से जिले में शिक्षा व्यवस्था पटरी से उतर रही है। मार्च माह में तीन दिवसीय एसएमसी (विद्यालय प्रबंध समिति) प्रशिक्षण अधिकांश ब्लाकों में कागजों पर निपटा दिया गया। अब एक और जागरूकता कार्यशाला लापरवाही की भेंट चढ़ गई।
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25 अगस्त को राज्य परियोजना निदेशक कार्यालय से 31 अगस्त को एसएमसी अध्यक्षों की एक दिवसीय उन्मुखीकरण गोष्ठी ब्लाक स्तर पर आयोजित करने के निर्देश बीएसए को दिए थे। कार्यशाला का उद्देश्य एसएमसी अध्यक्ष को स्कूल व्यवस्था में उनके अधिकारों का कर्तव्य बोध कराना था। गुरुवार को ‘अमर उजाला’ ने जिले भर के बीआरसी केंद्रों पर गोष्ठी आयोजन की हकीकत की पड़ताल की।

पड़ताल में गोष्ठी आयोजन कागजों तक सिमटा मिला। एक भी केंद्र पर गोष्ठी का आयोजन नहीं हुआ। वहीं बीआरसी केंद्रों पर मौजूद एबीआरसी व अन्य स्टाफ ने भी ऐसे आयोजन की जानकारी से अनभिज्ञता व्यक्त की। हद तो तब हो गई जब खंड शिक्षा अधिकारियों ने गोष्ठी आयोजन की किसी भी तरह की जानकारी से ही साफ इनकार कर दिया। बोले कि बीएसए मुख्यालय से ऐसे किसी भी आयोजन का शेड्यूल जारी नहीं हुआ है।
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क्या बोलीं प्रभारी बीएसए
प्रभारी बीएसए नसरीम फारूकी ने बताया कि मुझे इस तरह के आयोजन की कोई जानकारी नहीं है। 24 से 28 अगस्त के बीच मैं आकस्मिक अवकाश पर थी। इस दौरान चार्ज नगर शिक्षाधिकारी आरके यादव के पास था। राज्य परियोजना निदेशक के पत्र यह फिर ई-मेल के बारे में जानकारी कर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

क्या बोले नगर शिक्षाधिकारी
24 अगस्त से 30 अगस्त तक जिले की कमान संभालने वाले नगर शिक्षाधिकारी आरके यादव ने बताया एसएमसी अध्यक्षों की गोष्ठी आयोजन संबंधी जानकारी सभी बीईओ को दे दी गई थी। बीईओ जानकारी न होने की बात कहकर जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ रहे हैं। आगे की जवाबदेही तय करने की जिम्मेदारी प्रभारी बीएसए की है।

गोष्ठी में इन बिंदुओं पर था फोकस
परिषदीय स्कूलों में शिक्षकों के आने-जाने, पठन पाठन के माहौल, मिड्-डे मील व अन्य योजनाओं की मानीटरिंग के लिए गठित विद्यालय प्रबंध समिति अध्यक्षों को स्कूलों में संचालित समस्त योजनाओं, शिक्षकों के आने जाने पर निगरानी, विद्यालय विकास योजना, सोशल आडिट के बारे में जानकारी दी जानी थी। अफसरों की लापरवाही से फिलहाल राज्य परियोजना निदेशक की मंशा दम तोड़ गई।

बैठकों का 8.5 लाख का था बजट
ब्लाक स्तर पर आयोजित होने वाली कार्यशाला के प्रचार प्रसार, स्कूलों में बैनर लगाने के साथ ही पंपलेट वितरित किए जाने थे। इसके अलावा बीईओ को बीआरसी में प्रतिभागियों के बैठने व जलपान की व्यवस्था के निर्देश थे। इसके लिए ब्लाक वार 5-5 हजार रुपये का बजट आवंटित किया गया। ब्लाक स्तर पर न तो गोष्ठी आयोजित हुई। न ही कोई इंतजाम देखने को ही मिले।
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-कार्यालयों पर जड़े रहे ताले
अमर उजाला ब्यूरो
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