अमर उजाला ब्यूरो
उन्नाव। चार दिन पहले सिग्नल केबल शार्ट होने से करीब साढ़े चार घंटे तक ठप रहे ट्रेनों के संचालन की जांच शुरू हो गई है। दिल्ली रूट की ट्रेनों की रफ्तार थमने से बड़ौदा हाउस ने रिपोर्ट तलब की है। जिससे लखनऊ मंडल के अधिकारियों में हड़कंप मच गया। सूत्रों की मानें तो जीएम ने सीनियर सेक्शन इंजीनियर (सिग्नल), जूनियर इंजीनियर (विद्युत) व स्टेशन अधीक्षक को तलब किया है। उधर, डीआरएम ने मामले की जांच शुरू कर दी है।
उन्नाव रेलवे स्टेशन के पश्चिमी केबिन के पास सिग्नल केबिल के अलावा एक के ऊपर से अन्य केबिल निकाली गई हैं। जबकि रेलवे गाइड लाइन के तहत सिग्नल केबल के ऊपर से कोई भी दूसरी केबिल नहीं निकाली जा सकती है। यह व्यवस्था सिग्नल केबल को सुरक्षित रखने के लिए की गई है। 14 जून की रात सिग्नल व विद्युत विभाग के अफसरों की लापरवाही से सिग्नल केबल शार्ट हो गई। जिससे सिग्नल ठप हो गए और अप व डाउन ट्रैक पर ट्रेनों का संचालन ठप हो गया। करीब साढ़े चार घंटे तक सिग्नल ठप रहने से डाउन ट्रैक की साबरमती एक्सप्रेस, बरौनी ग्वालियर, आम्रपाली एक्सप्रेस को गंगाघाट, मगरवारा स्टेशन पर इमरजेंसी में रोका गया था।
वहीं अप ट्रैक की एलटीटी लखनऊ एक्सप्रेस, अहमदाबाद-लखनऊ, संपर्क क्रांति, गोरखधाम, कुशीनगर, आगरा कैंट, वैशाली, गोरखपुर पनेवल, मऊ एक्सप्रेस समेत 13 ट्रेनों का कुसुंभी, अजगैन, जैतीपुर, हरौनी, मानकनगर और लखनऊ सेंट्रल स्टेशन पर रोका गया था। इनमें से कई ट्रेनें दिल्ली रूट की थी।
स्थानीय अधिकारियों ने पूरे मामले को दबाने की कोशिश की लेकिन दिल्ली रूट की ट्रेनों का परिचालन ठप होने से चूक पकड़ी गई। बड़ौदा हाउस ने 15 जून को उत्तर रेलवे के अधिकारियों से स्पष्टीकरण तलब किया। डीआरएम लखनऊ मंडल सतीश कुमार ने मामले की उच्चस्तरीय जांच के निर्देश दिए हैं। वह खुद पूरे मामले की मानीटरिंग कर रहे हैं। डीआरएम ने सिग्नल फेल होने की पुष्टि करते हुए जांच की बात कही है। ज्यादा कुछ न बोलते हुए उन्होंने जांच में दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई के संकेत दिए हैं।
-14 जून की रात सिग्नल केबल शार्ट होने से दिल्ली रूट की 13 टेनें साढ़े चार घंटे तक रही थी प्रभावित
- बड़ौदा हाउस के रिपोर्ट तलब करने पर लखनऊ के अफसरों में मचा हड़कंप