बिहार विधानसभा चुनावों में राष्ट्रीय जनता दल के नेता तेजस्वी यादव द्वारा किया गया 10 लाख नौकरियों का वायदा बेहद कारगर रहा था। चुनाव विश्लेषकों की दृष्टि में इस मुद्दे ने पूरे चुनाव का रूख मोड़ दिया था। इसकी सबसे बड़ी वजह राज्य में बड़ी संख्या में युवाओं का बेरोजगार होना हो सकता है। बिहार के इस अनुभव को देखते हुए विपक्षी दल उत्तर प्रदेश विधानसभा चुुनाव में भी रोजगार को ही प्रमुख मुद्दा बना सकते हैं। लगभग एक वर्ष बाद होने वाले इस चुनाव में विपक्ष युवाओं पर ही अपना सबसे बड़ा दांव लगा सकते हैं।
मुख्य विपक्षी दल समाजवादी पार्टी के नेता राजेंद्र चौधरी ने अमर उजाला से कहा कि योगी आदित्यनाथ सरकार युवाओं को रोजगार देने के मोर्चे पर बिल्कुल असफल साबित हुई है। योगी सरकार ने उन नौकरियों को भी खत्म करने का काम किया है जिन्हें अखिलेश यादव सरकार ने अपने समय में शुरू किया था।
उन्होंने कहा कि इतना ही नहीं, सरकारी नौकरियों के भरे जाने के पहले युवाओं को तीन साल तक अस्थाई प्रकृति पर काम करना पड़ेगा और इसके बाद उन्हें स्थाई नियुक्ति दी जाएगी। यह केवल भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने का खेल है और युवाओं में सरकार के इस निर्णय के विरोध में बहुत आक्रोश है। वे चुनाव में इसका जवाब उत्तर प्रदेश सरकार को देंगे।
राजेंद्र चौधरी के अनुसार अखिलेश यादव युवाओं के लिए हमेशा काम करते रहे हैं और उनके कार्यकाल में बार-बार अनेक नियुक्तियां निकालकर भर्तियां की गई थीं। इस बार युवाओं से हम अपने उसी काम को दुहराने का वायदा करेंगे। वे चुनावों के लिए पार्टी की नीतिगत घोषणा भी जल्दी ही करेंगे जिसमें युवा सबसे प्रमुख रहेंगे।
कांग्रेस नेता अखिलेश प्रताप सिंह ने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार ने चार साल में युवाओं को गाय, राम और धर्म के नाम पर बरगलाने का काम किया है। सरकारी नियुक्तियों को ठहराव मोड पर ला दिया गया है। लेकिन कोरोना काल के संकट ने युवाओं को इस बात का अहसास करवा दिया है कि उनके लिए रोजगार से बड़ी कोई दूसरी प्राथमिकता नहीं हो सकती। उन्होंने कहा कि लोगों को अब ज्यादा देर तक बरगलाना संभव नहीं है। उन्हें अब रोजगार चाहिए और जो भी उनकी आकांक्षाओं को पूरा करेगा, वही राजनीतीक दल सत्ता हासिल करेगा।
कांग्रेस नेता के मुताबिक योगी आदित्यनाथ सरकार रोजगार देने के नाम पर मनरेगा के काम को भी गिनवा रही है। यह साबित करता है कि रोजगार के नाम पर उनके पास कोई विजन नहीं है। मनरेगा में मिट्टी भरने का काम किसी युवा को रोजगार के तौर पर नहीं गिनाया जा सकता। अगर भाजपा युुवाओं को मनरेगा काम के लायक ही समझती है तो यही युवा उसे चुनाव में सबक सिखाएंगे।
अखिलेश प्रताप सिंह ने कहा कि अब चुनाव का चरित्र बदल रहा है। जनता भावनात्मक मुद्दों की असलियत समझ चुकी है। बिहार ने भाजपा जैसे राजनीतिक दलों को भी समझा दिया है कि अब चुनाव वही जीतेगा जो जनता को रोजी-रोजगार देगा। उनकी पार्टी की रणनीति के केंद्र में भी युवा ही रहेंगे।
राष्ट्रीय जनता दल के प्रवक्ता डॉक्टर नवलकिशोर ने कहा कि बिहार में हमारे नेता तेजस्वी यादव ने 10 लाख नौकरियों का वायदा किया था। यह वायदा ठोस जमीन पर आधारित था और इसके लिए किन क्षेत्रों का चयन करना होता, आवश्यक धन कहां से आता, इसकी पूरी रूपरेखा बनाकर यह घोषणा की गई थी। फिलहाल, अब नई सरकार को युवाओं को 19 लाख रोजगार और एक करोड़ महिलाओं को स्वरोजगार देने का वायदा निभाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि बिहार में बेरोजगारी सबसे प्रमुख मुद्दा है और पिछले 15 साल में नीतीश सरकार का काम करने का जो तरीका रहा है, उसे देखकर यह उम्मीद नहीं बंधती है कि वे इस बार भी युवाओं को रोजगार दे पाएंगे। लेकिन अगर वे ऐसा कर सके तो बिहार और यहां के युवाओं के हित में होगा।