वहीं शिवहरि के साथ गिरफ्तार किए गये सब्जी विक्रेता दयाराम ने बयान दिया कि उसने कभी अशरफ को देखा तक नहीं है। जेल के बाहर दुकान लगाने वाले विक्की तथा जेल वार्डर रामनरायन ने मेरी पहचान अशरफ के साले सद्दाम से कराई थी।
सद्दाम अशरफ के लिए बिल्ली का चारा, नमकीन, बिस्कुट, पान आदि लेकर आता था, जिसे कैंटीन के सामान के साथ जेल के अंदर भेजा जाता था। ये सामान मैं लम्बरदार लाला राम को दे देता था। वहीं लालाराम ने अपने बयान में अशरफ तक सामान पहुंचाने की बात कबूली है।
दो घंटे तक चली थी अशरफ से मुलाकात
जांच में सामने आया है कि अजहर ने 11 फरवरी को मुलाकात के लिए आवेदन किया जिसके साथ असद का आधार कार्ड भी पर्ची के साथ पाया गया। वहीं 11 फरवरी के सीसीटीवी फुटेज देखने से पता चला कि दोपहर 1.22 बजे सात-आठ लोग जेल आए थे। करीब दो घंटे बिताने के बाद दोपहर 3.14 बजे सभी जेल से बाहर चले गए।
अशरफ को पहले से नहीं जानते थे राशिद और फुरकान
बरेली पुलिस ने जेल में मुलाकात करने वाले जिस राशिद और फुरकान को गिरफ्तार किया था, वह अशरफ को पहले से नहीं जानते थे।
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वरिष्ठ अधिकारियों की भूमिका संदिग्ध
डीआईजी जेल बरेली रेंज की रिपोर्ट के मुताबिक वरिष्ठ जेल अधीक्षक राजीव कुमार शुक्ला का अधीनस्थों पर कोई नियंत्रण नहीं था। वहीं जेलर राजीव कुमार मिश्रा अशरफ के मुलाकात आवेदनों पर हस्ताक्षर करने से बचते रहे। बरेली जेल के दूसरे जेलर अपूर्वव्रत पाठक ने अपने बयान में कहा कि 31 अगस्त से बंदियों की मुलाकात कराने का जिम्मा डिप्टी जेलर दुर्गेश प्रताप सिंह का था जबकि मुलाकात के पर्यवेक्षण की जिम्मेदारी जेलर राजीव कुमार मिश्रा संभाल रहे थे।
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