इलाहाबाद यूनिवर्सिटी समेत प्रदेश के अधिकतर विश्वविद्यालयों और कालेजों का यूजीसी फंड रुकने का खतरा उत्पन्न हो गया है।
आयोग ने नैक की ग्रेडिंग न लेने वाले विश्वविद्यालयों तथा कालेजों का फंड रोकने की घोषणा की है। यह निर्णय यूजीसी बोर्ड की बैठक में लिया गया। आयोग ने नैक की ग्रेडिंग के लिए विश्वविद्यालयों को एक जून तक आवेदन करने का समय दिया है। आवेदन न करने वाले संस्थानों का एक अप्रैल 2015 से फंड रोक दिया जाएगा। खास यह कि आयोग ने रोजाना का खर्च रोकने का भी आदेश दिया है। ऐसे में वेतन भी रोका जा सकता है।
आयोग के इस फैसले के बाद प्रदेश के कई संस्थानों का फंड रुकने का अंदेशा बन गया है। इविवि में नैक ग्रेडिंग के लिए कई वर्षों से कोशिश की जा रही है। तीन बार समिति भी बन चुकी है। इसके बाद भी अभी तक इसके लिए प्रस्ताव नहीं भेजा जा सका। हालांकि बताया जा रहा है कि 1600 पेज का प्रस्ताव तैयार किया जा चुका है।
बस कुलपति के हस्ताक्षर का इंतजार है। राज्य विश्वविद्यालयों में भी सिर्फ दो ने नैक की ग्रेडिंग ली है। इनके अलावा एक ने प्रस्ताव भेजा है। अन्य विश्वविद्यालयों में अभी कोई तैयारी नहीं है। कालेजों की तो और भी बुरी स्थिति है। प्रदेश के कुल 138 राजकीय महाविद्यालयों में मात्र 28 को नैक की ग्रेडिंग मिली है।
अनुदान प्राप्त करने वाले प्रबंधन कालेजों की भी कमोवेश यही स्थिति है। निजी कालेजों की तो और भी खराब स्थिति है। गौर करने वाली बात यह है कि अधिकतर कालेजों में नैक के अनुसार न्यूनतम सुविधाएं भी नहीं हैं। ऐसे में इनके एक जून तक नैक ग्रेडिंग के लिए प्रस्ताव भेजे जाने की भी उम्मीद नहीं है। यदि ऐसा होता है तो इनका फंड रुक सकता है।
उच्च शिक्षा निदेशक डॉ. नावेद बहार खान और उच्च शिक्षा परिषद के अपर सचिव डॉ. आरपीएस यादव ने माना कि प्रदेश में नैक ग्रेडिंग की स्थिति ठीक नहीं है। डॉ. नावेद का कहना है कि उन्हें आयोग के आदेश की जानकारी नहीं है। उसे देखने के बाद ही कुछ कहा जा सकता है।