टीईटी 2011 में दो लाख 70 हजार बीएड डिग्री धारक सफल हुए थे। लंबे संघर्ष के बाद चयन के लिए राह खुली है लेकिन केवल 72 हजार 825 का ही चयन होना है। बाकी दो लाख से अधिक टीईटी पास बीएड धारक बेकार ही रहेंगे। उन्हें इस चयन के बाद प्राथमिक शिक्षा विभाग में मौका नहीं मिलेगा।
शेष बीएड धारकों को माध्यमिक में ही नौकरी तलाशनी होगी। दरअसल सरकार ने एनसीटीई के निर्देश पर चयन नियमावली में बदलाव कर प्राथमिक विद्यालयों में अगली नियुक्तियों में बीटीसी से चयन को कहा है।
प्रदेश में पहली बार 2010 में टीईटी का आयोजन किया गया था। इसमें लगभग साढ़े छह लाख बीएड बेरोजगार शामिल हुए थे। इस परीक्षा में 2.70 लाख अभ्यर्थी सफल हुए थे। यह सफल टीईटी वाले नौकरी के लिए लगातार दो वर्ष से कोर्ट और सरकारी अधिकारियों के चक्कर लगा रहे हैं।
सरकार की ओर से शेष बीएड वालों के लिए कोई विकल्प दिए बिना ही नौकरी के दरवाजे बंद हो जाएंगे। आखिर में इन अभ्यर्थियों की ओर से टीईटी पास करने के बाद नौकरी के लिए किया जाने वाले प्रयास निरर्थक साबित होगा।
पहली बार टीईटी के आयोजन एवं रिजल्ट घोषित करने को लेकर आरोप-प्रत्यारोप और जांच के घेरे में आने के कारण भर्ती में अड़चन आई। इसका नतीजा यह रहा कि वर्तमान प्रदेश सरकार ने शिक्षक भर्ती के लिए पूर्व में तय मानक को बदलते हुए शैक्षिक मेरिट के आधार पर चयन का निर्णय लिया।
प्रदेश में लगातार बीएड कॉलेज की संख्या में बढ़ोतरी के कारण इस समय प्रदेश में लगभग 10 लाख बीएड पास अभ्यर्थी बेरोजगार हैं। इसी का नतीजा है कि वर्तमान समय में प्रदेश में इस समय बीएड की लगभग 1.20 लाख सीटें हो गई हैं। हर वर्ष एक लाख से अधिक निकलने वाले बीएड प्रशिक्षितों की नौकरी के लिए कोई व्यवस्था नहीं है।