इन दिनों सोने के खजाने को लेकर उत्तर प्रदेश के उन्नाव का डौंडिया खेड़ा चर्चाओं में है।
14 साल पहले इलाके के मांडी गांव में किसान के खेत से डेढ़ क्विंटल सोना निकला था। पुरातत्व विभाग की टीम ने कई महीने गांव में डेरा डाले रखा था।
आज भी सोने का जिक्र छिड़ते ही ग्रामीण मांडी गांव का नाम लेना नहीं भूलते। पानीपत-खटीमा मार्ग पर बघरा के निकट बसे मांडी गांव में भी कभी सोने की खुदाई हुई थी।
तस्वीरों में: सोने के खजाने की तलाश
मामला 14 साल पहले का है। मांडी का किसान अनिल कुमार अपने खेत से मिट्टी उठवा रहा था।
सबसे पहले चांदी से भरा घड़ा निकला। गांव में चर्चा हुई तो कुछेक ग्रामीणों ने मौके पर पहुंचकर खुदाई शुरू कर दी। खुदाई में सोना निकला।
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक लगभग डेढ़ क्विंटल सोना किसान के खेत से निकला था। तितावी पुलिस भी मौके पर पहुंच गई थी। दबाव बनने पर कुछेक लोगों ने थाने में भी सोना जमा करा दिया था।
बाद में पुरातत्व विभाग की टीम गांव पहुंची। कई महीने तक भारी पुलिसबल तैनात रहा। खेत की खुदाई की गई, लेकिन इसके बाद कुछ हासिल नहीं हुआ।
ग्राम प्रधान विपिन कुमार बताते हैं कि ऊंचे टीले की खुदाई के दौरान सोना निकला था।
जमा कराए थे कंगन
पुरातत्व विभाग ने सोने के विशेष कंगनों की पड़ताल की थी। इन्हें हड़प्पा सभ्यता से जोड़कर देखा गया था। प्रधान ने बताया कि पुलिस और पुरातत्व विभाग के पास जो कंगन थे, वह विशेष प्रकार के थे।
दो दिन बांटते रहे सोना
चौंकाने वाली बात यह कि मांडी में दो दिन तक सोने की खुदाई होती रही। पीली धातु की खुदाई से ग्रामीण उसकी तह तक नहीं जा सके। दो दिन तक इस धातु को एक-दूसरे को यूं ही देते रहे।
लेकिन जैसे ही सुनार ने इसके सोना होने की पुष्टि की तो ग्रामीण भौंचक रह गए थे। जिन-जिन लोगों को धातु समझकर सोना दिया था उनसे वापस मांगने को लेकर भी कहासुनी हुई।