आतंकी असदुल्लाह उर्फ तबरेज उर्फ हड्डी की गिरफ्तारी के साथ ही आजमगढ़ एक बार फिर सुर्खियों में है।
असदुल्लाह मूल रूप से देवगांव कोतवाली क्षेत्र के बैरीडीह गांव का निवासी है। वह 2008 में हुए बाटला हाउस मुठभेड़ में आरोपी है।
इस कांड के बाद से हड्डी फरार चल रहा था। उस पर 10 लाख रुपये का ईनाम घोषित किया गया था। खुफिया तंत्र की माने तो असदुल्लाह के विरुद्ध कुल 42 मामले दर्ज हैं। इसमें दिल्ली में सात, अहमदाबाद में 20 तथा सूरत में 15 मामले शामिल है।
आजमगढ़ में असदुल्लाह के खिलाफ कोई मामला दर्ज नहीं है। फरार असदुल्लाह की तलाश में कई प्रांतों की पुलिस उसके घर पर छापेमारी भी की थी। असदुल्लाह की गिरफ्तारी के बाद अभी भी विभिन्न ब्लास्ट के मामलों में पुलिस को जिले के सात युवकों की तलाश है। ये लोग घर छोड़ फरार चल रहे हैं।
असदुल्लाह के घर पर डेढ़ वर्ष पूर्व कुर्की की नोटिस दिल्ली पुलिस चस्पा कर चुकी थी। खुफिया विभाग की मानें तो हड्डी काफी पहले कश्मीर में भी पकड़ा जा चुका है।
हड्डी के पिता हड्डी रोग विशेषज्ञ
असदुल्लाह उर्फ हड्डी के पिता डॉ. जावेद अख्तर जिले के हड्डी रोग विशेषज्ञ हैं। गांव में पढ़ाई और बाद में डाक्टरी की तालीम हासिल कर शहर में आए डा. जावेद शहर कोतवाली क्षेत्र के गुलामी का पुरा मुहल्ले में मकान बनवाकर परिवार के साथ रहने लगे थे। उनका दवा खाना पहले पहाड़पुर में था, बाद में ब्रह्मस्थान मुहल्ले में स्थापित कर उसे अस्पताल का रुप ले दिया गया।
दो भाईयों में बड़ा असदुल्ला अख्तर की प्राइमरी शिक्षा नगर के एक सुप्रसिद्ध कान्वेंट से हुई। ग्रेजुएशन शिब्ली कॉलेज, आजमगढ़ से पूरा किया। ग्रेजुएशन के बाद वह लखनऊ से बी. फार्मा करने लगा। इसके बाद उसने आजमगढ़ आना कम कर दिया।
इस बीच, 13 सितंबर 2008 में दिल्ली में सीरियल बम ब्लास्ट हुआ। इस घटना के सातवें दिन 19 सितंबर 2008 को बाटला हाउस में पुलिस की बदमाशों से हुई। मुठभेड़ में मारे गए और पकड़े गए युवकों से जिले का नाम सुर्ख्यों में आया।
इस दौरान पुलिस की गोली से सरायमीर थाने के संजरपुर गांव निवासी आतिफ, साजिश मारे गए। साथ ही पुलिस ने सैफ पुत्र शादाब उर्फ मिस्टर को दिल्ली पुलिस ने गिरफ्तार किया था। इस घटना के बाद से एनआईए ने जिले के निवासी असदुल्लाह उर्फ हड्डी उर्फ तबरेज, दिल्ली ब्लास्ट में दोषी पाकर सजा काट रहे शहजाद सहित आठ युवकों का नाम प्रकाश में आए।
एनआईए को सात युवकों की तलाश
दिल्ली ब्लास्ट के बाद आजमगढ़ के सरायमीर थाने के संजरपुर गांव निवासी बड़ा साजिद पुत्र स्व. कुरैश, मो. खालिद पुत्र सगीर अहमद, अबू राशिद, डा. शाहनवाज पुत्र शादाब उर्फ मिस्टर, शहर कोतवाली क्षेत्र के कोट किला मुहल्ला निवासी मिर्जा शादाब बेग, बिलरियागंज थाने के नसीरपुर गांव निवासी आरिज पुत्र स्व. जफर आलम, निजामाबाद थाने के चकिया गांव निवासी वासीत उर्फ बिल्ला, का नाम प्रकाश में आया। यह सभी घटना के बाद से फरार हैं।
एनआईए को सातों की तलाश है। खुफिया विभाग की मानें तो वासीत उर्फ बिल्ला और अबू राशिद का नाम वर्ष 2010 में हुए वाराणसी बम धमाके में आया था। अन्य फरार आरोपी दिल्ली और अहमदाबाद ब्लास्ट में वांछित है। इसमें पुलिस मिर्जा शादाब बेग के घर की कुर्की भी कर चुकी है।