ताजमहल को दीमक से खतरा है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) की केमिस्ट्री शाखा इन दिनों ताज की नींव के आसपास दीमक का पता लगाने के लिए परीक्षण कर रही है। इसके लिए विशेष प्रकार के केमिकल का प्रयोग किया जा रहा है। ताज की बुनियाद की मिट्टी के नमूने भी लिए हैं।
दुनिया के सात अजूबों में से एक ताजमहल की संरक्षा को लेकर समय-समय पर शोध और अध्ययन होते रहे हैं। कई पुरातत्व विद्वानों ने ताजमहल की बुनियाद के लिए यमुना जल को आवश्यक बताया है। इन दिनों भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग की केमिस्ट्री शाखा ताज की बुनियाद में दीमक के खतरे का पता लगाने को अध्ययन कर रही है।
ताज की बुनियाद लकड़ी के कुओं पर टिके होने की बात कही जाती रही है। इस बुनियाद में कहीं दीमक ने तो अपना घर नहीं बना लिया। इन्हीं आशंकाओं के चलते ताजमहल में बनी दोनों असली कब्रों के स्थल और निचले हिस्से में परीक्षण कार्य किया जा रहा है।
विशेषज्ञों के मुताबिक दीमक का पता लगाने को हल्की सी खुदाई के बाद एक केमिकल (जो दीमक को आकर्षित करता है) डाला जा रहा है। यदि बुनियाद के किसी हिस्से में दीमक का कीड़ा होगा तो वह केमिकल को खाने आएगा। इस तरह दीमक के यहां होने का पता चल जाएगा।
बुनियाद की मिट्टी लैब में भेजी जाएगी
बुनियाद की मिट्टी के नमूने को परीक्षण के लिए लैब में भेजा जाएगा। यदि मिट्टी में कहीं दीमक का अंडा या लार्वा आदि होगा तो नमूने के परीक्षण से साफ हो जाएगा। इसके बाद केमिकल द्वारा सफाया इनका सफाया किया जाएगा। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि अभी परीक्षण का दौर चल रहा है। रिपोर्ट आने के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
ताजमहल की बुनियाद में दीमक की आशंका को लेकर परीक्षण किया जा रहा है। इसकी आशंका बहुत कम है, लेकिन कार्य चल रहा है।
- डॉ. एमएस भटनागर, उप अधीक्षण पुरातत्वविद् (एएसआई)