चार करोड़ रुपये की लागत से निर्मित स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (सेल) का वेयर हाउस पिछले दो साल से बंद पड़ा है। वेयर हाउस के संचालन से लोगों को सेल के उच्च गुणवत्ता के उत्पाद यहां आसानी से मिल जाते थे। कम ही संख्या में सही क्षेत्र के कुछ लोगों को अस्थाई रोजगार भी मिल जाता था। दो साल में वेयर हाउस के संचालन की आवाज न कांग्रेस ने उठाई और न ही भाजपा ही इस ओर कोई कदम बढ़ाती दिख रही है।
सांसद राहुल गांधी के प्रयास से 27 फरवरी 2009 में स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (सेल) ने 740 एकड़ भूभाग को टेप्ट रिकवरी ट्रिब्यूनल नई दिल्ली (टीआरडी) से 209 करोड़ रुपये में खरीद कर चलाने की घोषणा की थी। सेल ने वर्ष 2010 में चार करोड़ की लागत से वेयर हाउस का निर्माण कराकर दुर्गापुर, भिलाई, राउरकेला समेत अन्य कारखानों में निर्मित उत्पादों को यहां स्टोर कर बिक्री का कार्य शुरू किया था। इससे सेल में निर्मित सरिया, गार्डर समेत उच्च गुणवत्ता के लोहे के सामान ग्राहकों को यहीं आसानी से मिल जाते थे। स्थानीय लोगों को अस्थाई रोजगार भी मिल जाता था।
वर्ष 2013 में इस वेयर हाउस में माल आना बंद हो गया। केंद्र सरकार के बदलने के बाद भाजपा से लोगों को उम्मीदें बढ़ीं थी लेकिन इस दिशा में उसकी चुप्पी लोगों को निराश कर रही है। पिछले जून माह में सेल वेयर हाउस के ग्राउंड में बिछे यॉर्ड को यहां से उठा ले गई। दोमंजिला बिल्डिंग, कंप्यूटर, फर्नीचर, धर्मकांटा सब धूल फांक रहे हैं। कर्मचारियों के नाम पर महज एक चौकीदार है।