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सब्जी विक्रेता की बेटी ने किया कमाल

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सुल्तानपुर। ‘कौन कहता है आसमां में सुराख हो नहीं सकता, एक पत्थर तो तबीयत से उछालो यारो’। दुष्यंत कुमार की इन पंक्तियों को जिले की मेधावी छात्रा पूजा मौर्या ने सच कर दिखाया। उसने सचमुच आसमान में सुराख कर दिया। ग्रामीण अंचल के कुड़वार स्थित धर्मा देवी बद्री प्रसाद इंटर कॉलेज में अध्ययनरत इस बिटिया ने यूपी बोर्ड इंटरमीडिएट परीक्षा परिणाम की प्रदेश स्तरीय सूची में सातवां स्थान हासिल कर प्रगति में आर्थिक तंगी को बाधक मानने वालों की संकुचित सोच को शिकस्त दे दी है। जिले की मेरिट लिस्ट में पूजा को दूसरा स्थान मिला है।
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इसरौली गांव निवासी पूजा के पिता रामसूरत मौर्या कुड़वार बाजार में सब्जी की दुकान करते हैं। माता नेपाला देवी गृहणी हैं। घर की माली हालत अच्छी नहीं है। रामसूरत की पांच संतानों में चार पुत्रियां और एक पुत्र है। इनमें पूजा दूसरे नंबर की है। ऐसे मुफलिसी के हालात में पांच बच्चों की परवरिश व उनकी पढ़ाई-लिखाई की जिम्मेदारी रामसूरत के लिए आसान नहीं थी। इसके बावजूद रामसूरत ने बच्चों की पढ़ाई में कोई कोरकसर नहीं छोड़ी। उनकी कोशिश रही कि बच्चे मन लगाकर पढ़ें। उन्होंने बच्चों को कभी यह महसूस नहीं होने दिया कि वे किसी तरह की परेशानी में हैं।
पूजा ने बताया कि उम्र बढ़ने के साथ हमें माता-पिता की परेशानियों का बखूबी एहसास हो गया था। साथ ही पिता के सपनों का भी पता था। पिता ने अपनी थोड़ी सी कमाई में भी पढ़ाई के लिए कभी खर्च देने में कोताही नहीं बरती। माता-पिता पढ़ाई में अपने सभी बच्चों की हरसंभव मदद करते रहे। हमने भी अपने माता-पिता के अरमानों को पूरा करने के लिए रात-दिन एक कर दिया। खूब मन लगाकर पढ़ाई की। मेरे साथ ही पिता का भी यह सपना है कि मैं आईआईटी कर इंजीनियर बनूं। पिता के सपनों को पूरा करने के लिए मैं कोई कसर बाकी नहीं रखूंगी।
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सिविल सर्विसेज के जरिए देशसेवा का लक्ष्य
भविष्य में सिविल सर्विसेज के जरिए देशसेवा करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। हमारी सफलता में माता-पिता व गुरुजनों का सहयोग है। पिता अशोक कुमार दुबे सरस्वती विद्या मंदिर इंटर कॉलेज झारखंड में ही शिक्षक हैं। माता सुनीता गृहिणी हैं। प्रतिदिन सात से आठ घंटे अध्ययन की वजह से पढ़ाई अच्छी हुई थी। शिक्षक पिता की निगरानी में हमने व्यवस्थित तैयारी की थी। हाईस्कूल के बाद इंटरमीडिएट परीक्षा में भी उत्कृष्ट प्रदर्शन करने के लिए मेहनत करूंगा। इसके बाद स्नातक करने के बाद सिविल सर्विस की तैयारी करूंगा। हमारा लक्ष्य है कि आईएएस बनूं और देश की सेवा करूं।
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- अंकुश दुबे, (हाईस्कूल स्टेट मेरिट लिस्ट में नौवां स्थान, जिले में पहला स्थान)
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