यूपी के सुल्तानपुर में बल्दीराय के चर्चित श्रद्धा सिंह हत्याकांड में फास्ट ट्रैक कोर्ट द्वितीय ने गुरुवार को दो दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। न्यायाधीश स्वतंत्र प्रकाश ने परसौली मजरे ऐंजर निवासी सुभाष सिंह चौहान और जयकरन चौहान पर एक-एक लाख रुपये जुर्माना भी लगाया। जुर्माने की आधी रकम मृतका की मां अर्चना सिंह को देने का आदेश दिया गया है।
इससे पहले बुधवार को कोर्ट ने दोनों को हत्या का दोषी करार दिया था। बृहस्पतिवार दोपहर पुलिस दोनों को जेल से कोर्ट लेकर पहुंची। सजा के बिंदु पर सुनवाई के दौरान अभियोजन की ओर से एडीजीसी क्रिमिनल और वादी पक्ष के अधिवक्ता ने कड़ी सजा की मांग की। बचाव पक्ष ने दोषियों की उम्र और कमजोर आर्थिक स्थिति का हवाला देते हुए कम सजा देने की दलील दी। दोनों पक्षों को सुनने के बाद कोर्ट ने शाम 4:40 बजे फैसला सुनाया।
हैंडपंप पर पानी भरते समय श्रद्धा को जिंदा जलाया था
बल्दीराय थाना क्षेत्र के तड़रसा मजरे ऐंजर निवासी प्रदीप सिंह का आरोपियों से जमीन का विवाद था। 21 सितंबर 2020 को उनकी 17 वर्षीय बेटी श्रद्धा सिंह हैंडपंप पर पानी भर रही थी। आरोप है कि सुभाष और जयकरन ने उसे पकड़कर हाथ-पैर और मुंह बांध दिए और केरोसिन डालकर आग लगा दी।
गंभीर रूप से झुलसी श्रद्धा की इलाज के दौरान मौत हो गई थी। मामले में अर्चना देवी ने जगबरन यादव, सुभाष सिंह चौहान, जयकरन चौहान और महंथ के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई थी। सुनवाई के दौरान अभियोजन ने 12 और बचाव पक्ष ने तीन गवाह पेश किए।
एक आरोपी फरार रहा, दूसरे को हाईकोर्ट से स्टे
वादी पक्ष के अधिवक्ता के अनुसार, आरोपी महंथ लंबे समय तक फरार रहा। हाल में पुलिस ने उसे देहली बाजार से गिरफ्तार कर जेल भेजा। उसका मामला अभी विचाराधीन है। वहीं, आरोपी जगबरन यादव के मामले में हाईकोर्ट से स्टे होने के कारण सुनवाई रुकी है।
सजा सुनते ही रोने लगे परिजन
फैसला सुनाए जाने के दौरान दोनों दोषी शांत खड़े रहे। उनके अधिवक्ता ने हाईकोर्ट में अपील करने की बात कही। सजा के बाद दोषियों के परिजन फूट-फूटकर रोने लगे। मृतका के पिता प्रदीप सिंह ने फैसले पर संतोष जताते हुए कहा कि श्रद्धा के साथ हुई घटना के लिए सजा कम है। उन्होंने बताया कि घटना के समय श्रद्धा बीएससी प्रथम वर्ष की छात्रा थी।