प्राथमिक विद्यालय भीखमपुर में परीक्षा देते बच्चे।
सुल्तानपुर। परिषदीय स्कूलों में चल रही वार्षिक परीक्षाओं में कई तरह की कमियां सामने आ रही हैं। स्कूलों में पहुंचने वाले पेपर की संख्या में खेल किया जा रहा है। लिफाफे पर जितनी संख्या लिखी रहती है, उतने प्रश्नपत्र नहीं मिल रहे हैं। स्थिति यह है कि स्कूलों में पेपर कम पड़ रहे हैं, और बोलकर प्रश्न नोट कराए जा रहे हैं।
बुधवार को पहली पाली में कक्षा-दो की हिंदी, तीन में सामाजिक विषय और चार से आठ तक गणित का पेपर था। दूसरी पाली में कक्षा तीन से आठ तक कला का प्रश्नपत्र कराया गया। कला की परीक्षा में लिफाफे में प्रश्नपत्र कम थे। जहां तीस की संख्या थी, वहां पांच से सात प्रश्नपत्र पहुंचे। शिक्षकों ने बताया कि लिफाफे के ऊपर बच्चों की वास्तविक संख्या लिखी थी, लेकिन अंदर पेपर काफी कम थे।
करौंदीकला के छात्र रौनक ने बताया कि कक्षा सात की परीक्षा देने स्कूल पहुंचे थे। उन्हें गणित व कला का पेपर नहीं मिला। गणित में बगल वाले छात्र अनुपम के पास बैठकर सवालों का जवाब लिखा। कला में प्रश्नपत्र नहीं दिया गया। शिक्षक ने बोलकर प्रश्न को नोट कराया। प्रश्न हल करने में समय ही कम पड़ गया। अखंडनगर क्षेत्र के कंपोजिट विद्यालय में पढ़ने वाली पीहू शर्मा ने बताया कि उन्हें गणित का पेपर मिला था, लेकिन कला का पेपर नहीं मिला। इसी तरह कई स्कूलों में पेपर कम मिलने की बात सामने आई।
परीक्षा दो घंटे और पेपर ढाई घंटे का
परिषदीय परीक्षा की जो डेट शीट बच्चों व शिक्षकों को दी गई है। उसमें दोनों पालियों की परीक्षा दो-दो घंटे की है, लेकिन प्रश्नपत्रों में ढाई घंटे लिखकर आ रहा है। जिससे शिक्षक व बच्चे असमंजस में हैं।
डेटशीट के अनुसार हो रही परीक्षा
बेसिक शिक्षा अधिकारी उपेंद्र गुप्ता ने बताया कि परिषदीय परीक्षा में जो कमियां आ रही हैं, उन्हें सुधारा जाएगा। पेपर में गलती से ढाई घंटे छपा होगा, डेटशीट पर लिखित परीक्षा का समय दो घंटे है और उसी के अनुसार परीक्षा ली जा रही है।