सुल्तानपुर। मेडिकल कॉलेज होने के बावजूद जिले के गंभीर मरीज न्यूरो फिजीशियन और न्यूरो सर्जन की कमी से भटकने को मजबूर हैं। ट्रॉमा सेंटर और इमरजेंसी में गंभीर रूप से घायल या दिमाग व रीढ़ की हड्डी से जुड़ी समस्याओं वाले मरीजों को लखनऊ रेफर कर दिया जाता है। समय पर इलाज नहीं मिलने से कई बार मरीजों की जान भी चली जाती है।
मेडिकल कॉलेज में ट्यूमर, स्ट्रोक, उभरी हुई डिस्क, स्पाइनल स्टेनोसिस (रीढ़ की हड्डी का संकुचन) और सिर की चोट जैसे मामलों का उपचार संभव नहीं है। जानकारी के अनुसार, न्यूरो से संबंधित बीमारियों के 100 से अधिक मरीज रोजाना कॉलेज पहुंचते हैं, लेकिन विशेषज्ञ न होने से रेफर करना पड़ता है।
करौंदीकला के रामचंद्र ने बताया कि छह माह से सिरदर्द की समस्या है। रिपोर्ट में न्यूरो फिजीशियन की जरूरत बताई गई, लेकिन मेडिकल कॉलेज में विशेषज्ञ न होने से निजी चिकित्सक को दिखाना पड़ा। भदैंया निवासी अरविंद ने कहा कि रीढ़ की हड्डी में दर्द है, पर आर्थिक अभाव लखनऊ जाकर इलाज नहीं करा पा रहा।
मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. सलिल श्रीवास्तव ने कहा कि जल्द ही न्यूरो फिजीशियन और सर्जन की तैनाती होगी, जिससे मरीजों को जिले में ही राहत मिलेगी।