सुल्तानपुर। केंद्र सरकार से लेकर राज्य सरकारों तक ने लोगों से लॉकडाउन के दौरान जहां हैं वहीं रुक जाने की अपील की। उनके रहने-खाने से लेकर हर जरूरतों को पूरा करने का भरोसा दिलाया लेकिन रोजी-रोटी के सिलसिले में परदेस गए लोगों ने किसी पर एतबार नहीं किया।
चल पड़े अपने घर को। न वाहन के इंतजाम की फिक्र और न ही रास्ते की अन्य तकलीफों की परवाह। नतीजा यह है कि महज 24 घंटे में जिले में जिले के 214 व बाहरी जनपदों के 700 लोग अब तक यहां पहुंच चुके हैं।
पैरों में छाले पड़ गए हैं लेकिन मंजिल तक पहुंचने की जद्दोजहद जारी है। रविवार को ‘अमर उजाला’ ने जिले में पहुंचे थके हारे कुछ राहगीरों से बात की तो उनका दर्द फूट पड़ा।
जिले के जयसिंहपुर के गोसैसिंहपुर गांव निवासी शैलेश पांडेय ने बताया कि वे शनिवार को हरियाणा के गुडग़ांव से घर के लिए निकल पड़े थे। 25 किलोमीटर पैदल चलने के बाद आनंद विहार पहुंचे। वहां से एक सरकारी बस पर सवार हुए।
बस वाले ने लखनऊ में उतार दिया। वहां से पैदल बाईपास तक पहुंचे। फिर एक बस मिली जिसने अमहट में छोड़ दिया। यहां से वे पैदल ही शालीमार गेस्ट हाउस पहुंचे, जहां प्रशासन ने खाने-पीने व ठहरने का इंतजाम कर रखा है। कुछ देर यहां रुकने के बाद आगे को रवाना होंगे।
यही पीड़ा दोस्तपुर के अमित कुमार की रही। वे आगरा से लखनऊ आए। वहां से करीब 12 किलोमीटर पैदल चलने के बाद बस मिली जिसने अमहट में उतार दिया। सेमरी निवासी बृजभूषण सात लोगों के साथ आनंद विहार से लखनऊ आए।
बताया कि बस वाले ने तीन सौ रुपये का टिकट देकर सात-सात रुपये सभी से ले लिया। हालत यह हो गई कि लखनऊ से सुल्तानपुर के लिए पैदल निकलना पड़ा। पैरों में छाले पड़ गए हैं लेकिन घर पहुंचने की जद्दोजहद जारी है। बताया कि किसी तरह घर पहुंच जाएं, बस।
अकबरपुर के रहने वाले शिवकुमार किसी तरह पत्नी और बेटे के साथ अमहट में उतर गए लेकिन आगे के रास्ते की चुनौती है। फिलहाल पैदल चल पड़े हैं। मध्यप्रदेश के रहने वाले दो परिवार जिले के धनपतगंज के शंकरगढ़ में फुलकी बेचकर आजीविका चलाते थे।
दो लोगों के परिवार के आठ सदस्यों के साथ वे घर को निकल पड़े हैं। करीब 10 किलोमीटर बाद किसी मालवाहक ने शहर में छोड़ दिया। यहां से आगे का कोई रास्ता नहीं सूझ रहा है। साथ में चार बच्चे भी हैं।